विश्व मौसम संगठन का कहना है कि बदलती जल परिस्थितियों के लिए तैयार रहने में बेहतर निगरानी, आँकड़ों का आदान-प्रदान और समय पर चेतावनी की भूमिका अधिक महत्वपूर्ण होती जाएगी। संगठन ने हाल में चीन और नेपाल में चट्टान व हिमनद टूटने से जुड़ी आपदा को ‘आपस में जुड़े विनाशकारी संकटों’ का उदाहरण बताया। संगठन का कहना है कि इस घटना ने दिखाया कि ऐसे ख़तरों का पहले से अनुमान लगाना कितना मुश्किल है।
डब्ल्यूएमओ के अनुसार, दुनिया का जल चक्र अब पहले की तुलना में अधिक अनियमित और अप्रत्याशित होने के संकेत लगातार मिल रहे हैं। रिपोर्ट बताती हैं कि 2025 दुनिया भर में नदियों के प्रवाह के लिहाज़ से पिछले 35 वर्षों के सबसे शुष्क वर्षों में से एक रहा। विश्व के 36 प्रतिशत नदी घाटी क्षेत्रों में जल प्रवाह सामान्य से कम दर्ज किया गया।
संयुक्त राष्ट्र की मौसम एजेंसी ने बीते दिन चेतावनी दी कि दुनिया ऐसे दौर में प्रवेश कर रही है, जहाँ पानी की असामान्य उपलब्धता अब आम होती जा रही है। कहीं अत्यधिक मात्रा में पानी तो कहीं उसकी भीषण कमी देखने को मिल रही है, जबकि नदियों के प्रवाह, भूजल और हिमनदों में भी लगातार बदलाव के संकेत मिल रहे हैं।
संगठन की नवीनतम ‘वैश्विक जल संसाधनों की स्थिति’ रिपोर्ट पेश करते हुए विश्व मौसम विज्ञान संगठन की महासचिव सेलेस्टे साउलो ने कहा, ‘यह केवल एक ख़राब वर्ष की बात नहीं है, बल्कि एक ऐसा रुझान है जो पिछले एक दशक से लगातार दिखाई दे रहा है।’ उन्होंने आगे कहा कि जल से जुड़ी चरम घटनाएँ, समुदायों और अर्थव्यवस्थाओं पर लगातार विनाशकारी असर डाल रही हैं।
भूजल, हिमनद, बर्फ़, मिट्टी की नमी, झीलें व ज़मीन पर जमा मीठे पानी के अन्य भंडार, सूखे और कम वर्षा के समय सहारा देते हैं। सेलेस्टे साउलो ने इन्हें पृथ्वी का ‘बचत खाता’ बताया। उन्होंने कहा, ‘हम इस बचत खाते को लगातार खाली कर रहे हैं।’
गौरतलब है कि लगभग 2014-2016 के बाद से ज़मीन पर जमा पानी की मात्रा लगातार घट रही है, जबकि कई क्षेत्रों में भूजल स्तर भी वर्षों से नीचे जा रहा है। साल 2025 में निगरानी किए गए लगभग दो-तिहाई भूजल कुओं में जल स्तर सामान्य दायरे में नहीं था। साथ ही, सुधार के बजाय अधिक स्थानों पर पानी की कमी बढ़ती दिखाई दी।
रिपोर्ट्स में कुछ सकारात्मक संकेत भी मिले। दक्षिण अमरीका के कुछ हिस्सों में कई वर्षों की गंभीर कमी के बाद जल भंडार में कुछ सुधार हुआ जबकि मध्य और दक्षिणी अफ़्रीका की कई बड़ी झीलों में जल स्तर सामान्य से काफ़ी अधिक रहा।
डब्ल्यूएमओ में जल विज्ञान और हिममंडल के निदेशक वेन जेनकिन्सन का कहना है कि दुनिया के सभी 19 हिमनद क्षेत्रों में बर्फ़ की मात्रा कम हुई है। उनके मुताबिक़, मध्य एशिया, आइसलैंड, रूसी आर्कटिक और पश्चिमी कैनेडा व अमरीका में यह अब तक दर्ज तीन सबसे ख़राब वर्षों में से एक था।
केवल 2025 में ही हिमनदों ने लगभग 408 गीगाटन बर्फ़ खोई, जबकि 2023 से 2025 के बीच कुल नुक़सान लगभग 1,400 गीगाटन रहा। यह दुनिया में एक वर्ष में निकाले जाने वाले मीठे पानी की लगभग एक-तिहाई मात्रा के बराबर है।
जेनकिन्सन ने आगाह किया कि मध्य योरोप, कॉकेशस और पश्चिमी कैनेडा व अमरीका जैसे छोटे हिमनदों वाले कुछ क्षेत्र शायद पहले ही ‘पीक वॉटर’ की स्थिति में पहुँच चुके हैं, यानि वहाँ हिमनदों के पिघलने से मिलने वाला पानी अपने उच्चतम स्तर पर पहुँचने के बाद अब घटने लगा है।
रिपोर्ट में इन सभी बदलावों के लिए केवल जलवायु परिवर्तन को ज़िम्मेदार नहीं ठहराया गया है। संगठन के अनुसार, जल संसाधनों पर बढ़ता दबाव और प्राकृतिक उतार-चढ़ाव भी इसमें भूमिका निभा रहे हैं।
रिपोर्ट के मुताबिक़, पिछले पाँच वर्षों में जल से जुड़ी कम से कम आधी चरम घटनाएँ एशिया और अफ़्रीका में दर्ज की गईं। इन घटनाओं से हुई 80 प्रतिशत से अधिक मौतें भी इन्हीं क्षेत्रों में हुईं। इसके बावजूद, एशिया और अफ़्रीका में पानी की स्थिति पर नज़र रखने और उससे जुड़े आँकड़े जुटाने की व्यवस्था अब भी सबसे कमज़ोर है।
डब्ल्यूएमओ ने पाँच वर्ष पहले यह रिपोर्ट प्रकाशित करना शुरू किया था। उस समय केवल सात देश, 14 नदी-प्रवाह केन्द्रों से आँकड़े उपलब्ध कराते थे। अब 52 देश, 3100 से अधिक केन्द्रों से जानकारी साझा कर रहे हैं