डायबिटीज और हेपेटाइटिस बी की दवा होगी सस्ती, वैज्ञानिकों ने ईजाद की स्वदेशी तकनीक

चंडीगढ़। डायबिटीज और हेपेटाइटिस बी के लाखों रोगियों के लिए राहत भरी खबर है। अब उनकी दवाएं सस्ती हो सकती हैं। चंडीगढ़ स्थित इन्स्टीच्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (IMTECH) के वैज्ञानिकों ने स्वदेशी तकनीक ईजाद की है जिसके जरिए ऐसी दवाओं की कीमत तीन से चीर गुना सस्ती हो जाएगी। इस तकनीक से प्रोटीन आधारित दवाएं जैसे इन्सुलिन, स्ट्रेपटोकाइनेज (क्लॉट बस्टर) और हेपेटाइटिस बी का टीका बनाया जा सकेगा। फिलहाल भारत ऐसी दवाओं और पेटेंट टेक्नोलॉजी का आयात करता है जिससे ऐसी दवाएं बनती हैं। indian technology

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इम्टेक की ईजाद की गई नई तकनीक के महत्व का इसी से अंदाजा लगाया जा सकता है कि भारत चीन के बाद दुनिया का दूसरा ऐसा देश है जहां डायबिटीज और हेपेटाइटिस बी के सबसे ज्यादा मरीज हैं। भारत में 6.6 करोड़ डायबिटीज और 4 करोड़ हेपेटाइटिस बी के मरीज हैं। वैज्ञानिकों और रिसर्च फेलोज ने यह कामयाबी डॉ. जगमोहन सिंह के नेतृत्व में हासिल की है। डॉ. सिंह इन्स्टीच्यूट ऑफ माइक्रोबियल टेक्नोलॉजी (IMTECH) में प्रधान वैज्ञानिक हैं। उन्होंने बताया कि जल्द ही इन दवाओं का कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरु किया जाएगा।

फिलहाल भारत में हेपेटाइटिस बी के जो टीके मिल रहे हैं उनकी कीमत 45 रुपये से 250 रुपये के बीच है। बच्चों को लगने वाला टीका 0.5 मि.ली. में 10 माइक्रोग्राम का होता है जबकि वयस्कों को दिया जानेवाला 20 माइक्रोग्राम का होता है। इसकी कीमत दोगुनी होती है। इन्सुलिन की कीमत भी 140 रुपये से लेकर 325 रुपये प्रति इंजेक्शन होती है। स्लो वैरियेंट इन्सुलिन ग्लैरजिन की कीमत बाजार में 410 रुपये से 1475 रुपये के बीच प्रति वॉल्व है।

कुछ महीने पहले सरकार ने कैंसर, मधुमेह, विषाणु संक्रमण और उच रक्तचाप के इलाज में इस्तेमाल होने वाली 56 महत्त्वपूर्ण दवाओं की कीमतों की सीमा तय की थी। इससे औसतन कीमत में करीब 25 प्रतिशत की कमी होनी है। हालांकि औषधि कीमत नियामक राष्ट्रीय औषधि कीमत प्राधिकरण (एनपीपीए) ने ग्लूकोज और सोडियम क्लोराइड इंजेक्शन जैसे नसों में दिए जाने वाले फ्लूड के छोटी मात्रा के पैक की कीमतों में वृद्धि की थी।

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