गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड में जगह बनाने वाले भारतीय व्यंजन

ऐसे पांच भारतीय व्यंजन जिन्होंने गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाई और अपने ज़ायक़े के दम पर सरहदों को पार किया। इस सफर में इन व्यंजनों ने कई अलग-अलग संस्कृतियों का दिल जीता है और इस तरह अपनी पहचान बनाई है।

अकसर यूँ भी होता है कि कोई पसंदीदा भारतीय डिश अपने स्वाद से हटकर किसी और वजह से दुनिया भर का ध्यान खींचती है। फिर वह इतनी बड़ी चपाती हो जिसके लिए खास तौर पर तवा बनवाना पड़ा हो या 29 टन से ज़्यादा वज़न वाला लड्डू, ये रिकॉर्ड तोड़ने वाली चीज़ें खाना पकाने के प्रति भारत के उस प्यार को दिखाती हैं जिसकी कल्पना करना भी मुश्किल है। आज एक नज़र डालते हैं ऐसे पांच भारतीय व्यंजन पर जिन्होंने अपनी खासियत के चलते गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया है और मशहूर हुए।

बिरयानी
बहुत कम व्यंजन बिरयानी जैसी लोकप्रियता हासिल कर पते हैं। मसलों की खुशबू और परतों वाली अपनी खास पहचाल लिए यह डिश कई इलाक़ों के नाम से जनि जाती है। यह डिश भारत के सबसे बड़े खान-पान के राजदूतों में से एक बन गई है। साल 2008 में यह लोकप्रियता रिकॉर्ड तोड़ने वाले स्तर पर पहुँच गई जब नई दिल्ली में शेफ़ ने दुनिया की सबसे बड़ी बिरयानी बनाई, जिसका वज़न 14.06 टन था। उस विशाल बर्तन में हज़ारों किलोग्राम चावल, मीट, मसाले और घी का इस्तेमाल किया गया, जिसके लिए बहुत सावधानी से योजना बनानी पड़ी ताकि डिश का स्वाद और बनावट वैसी ही रहे जैसी एक अच्छी बिरयानी की होती है। यह कारनामा सिर्फ़ आकार के बारे में नहीं था। इसने दिखाया कि कैसे सदियों पुरानी रेसिपी को उसकी पहचान खोए बिना बड़े पैमाने पर बनाया जा सकता है।

खिचड़ी
सादे खाने का ज़िक्र करें अक्सर भारत का सबसे बेहतरीन ‘वन-पॉट मील’ कही जाने वाली खिचड़ी लंबे समय से खाने की दुनिया में अपनी पहचान रखती है। साल 2017 में नई दिल्ली में हुए ‘वर्ल्ड फ़ूड इंडिया’ इवेंट के दौरान शेफ़ संजीव कपूर और लगभग 50 शेफ़ की एक टीम ने 918 किलोग्राम खिचड़ी बनाई और चावल-दाल से बनी डिश की सबसे बड़ी सर्विंग का गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड बनाया। रिकॉर्ड कन्फर्म होने के बाद, इस खाने को चैरिटी संस्थाओं के ज़रिए बांटा गया, जिससे पोषण और समुदाय के साथ इस डिश का पुराना जुड़ाव बना रहा।

बूंदी के लड्डू
लड्डुओं के बिना कोई भी भारतीय जश्न पूरा नहीं लगता। ये शादियों, त्योहारों, मंदिर के प्रसाद और परिवार के खास मौकों पर बनाए जाते हैं, जिससे ये देश की सबसे पहचानी जाने वाली मिठाइयों में से एक बन गए हैं। भारत के अलग-अलग इलाकों में सदियों से लड्डू की अनगिनत किस्में बनी हैं। इनमें बेसन और मोतीचूर से लेकर रवा, नारियल और तिल वाले लड्डू तक। हर किस्म की अपनी स्थानीय परंपरा और त्योहारों से जुड़ी अहमियत है। इन क्षेत्रीय अंतरों के बावजूद, लड्डू जश्न, दरियादिली और अच्छे भाग्य का एक ऐसा प्रतीक बना हुआ है जो अलग-अलग संस्कृतियों, समुदायों और पीढ़ियों के लोगों को एक साथ लाता है।
साल 2016 में, आंध्र प्रदेश के तापेश्वरम के हलवाई पीवीवीएस मल्लिकार्जुन राव ने अब तक का सबसे बड़ा बूंदी का लड्डू बनाकर इस साधारण सी मिठाई को एक वर्ल्ड रिकॉर्ड में बदल दिया। इस मिठाई का वज़न हैरान करने वाला था – 29,465 किलोग्राम – और इसे बेसन, चीनी, घी, सूखे मेवे और इलायची की पारंपरिक रेसिपी से बनाया गया था। इसने साबित कर दिया कि भारत की सबसे जानी-पहचानी मिठाई भी दुनिया भर में सुर्खियां बटोर सकती है।

डोसा
सुनहरा, कुरकुरा डोसा दक्षिण भारत से निकलकर देश के सबसे पसंदीदा नाश्तों में से एक बन गया है। सड़क किनारे की साधारण दुकानों से लेकर शानदार रेस्टोरेंट तक, इसकी खासियत इसकी सादगी और अनगिनत किस्मों में है। चाहे इसे सादा परोसा जाए, मसालेदार आलू भरकर या फिर क्षेत्रीय चटनी और सांभर के साथ, डोसा नाश्ते का एक ऐसा अहम हिस्सा बन गया है जो पीढ़ियों से खान-पान की परंपरा और रोज़मर्रा के आराम, दोनों को दर्शाता है।
साल 2014 में, हैदराबाद में 29 शेफ़ की एक टीम ने दुनिया का सबसे लंबा डोसा बनाया, जिसकी लंबाई 16.68 मीटर (54 फ़ीट 8.69 इंच) थी। इतनी ज़्यादा लंबाई के बावजूद, डोसा में वह नाज़ुक कुरकुरापन और कागज़ जैसा पतला टेक्सचर बना रहा जो इस क्लासिक डिश की पहचान है। इसे बनाने के लिए ज़बरदस्त तालमेल, सटीकता और सही समय की ज़रूरत थी, जिसने रोज़ाना के नाश्ते को गिनीज़ वर्ल्ड रिकॉर्ड के लायक उपलब्धि में बदल दिया।

चपाती
इस लिस्ट में चपाती भले ही सबसे साधारण खाना हो, लेकिन इसने भारत के सबसे शानदार रिकॉर्ड में से एक भी बनाया है। सितंबर 2012 में, गुजरात के जामनगर में दगडू सेठ गणपति सार्वजनिक महोत्सव में 145 किलोग्राम वज़न वाली दुनिया की सबसे बड़ी चपाती बनाई गई। इस विशाल चपाती को 3 मीटर गुणा 3 मीटर की एक खास तौर पर बनाई गई मेटल प्लेट पर पकाया गया था। इस चपाती को बेलने, पलटने और समान रूप से पकाने के लिए दर्जनों वॉलंटियर्स की ज़रूरत पड़ी। यह उपलब्धि एक खास भारतीय भावना को दिखाती है।

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