भारतीय खिलाड़ियों ने स्कॉटलैंड के ग्लास्गो में चल रहे कॉमनवेल्थ गेम्स में पांचवे दिन भी अच्छा प्रदर्शन किया। शर्मिला धनखड़ ने पैरा एथलेटिक्स में कामयाबी हासिल करते हुए इतिहास रच दिया। उन्होंने पैरा एथलेटिक्स में सीजन का सबसे अच्छा थ्रो फेंककर मेडल जीता।
महिलाओं की शॉट पुट F57 प्रतियोगिता में शर्मिला धनखड़ ने शानदान प्रदर्शन किया और गोल्ड मेडल हासिल किया। शर्मिला ने 9.81 मीटर का बेहतरीन थ्रो किया। खेल के पांचवे दिन भारत ने छह मेडल जीते, जिसमें शर्मिला धनखड़ का महिलाओं की शॉट पुट F57 में ऐतिहासिक गोल्ड मेडल सबसे आगे रहा।
इसके अलावा ज्ञानेश्वरी यादव, सर्वेश कुशारे और वल्लूरी अजय बाबू ने सिल्वर मेडल जीते, और बिंद्यारानी देवी और शिल्पा के शायला ने ब्रॉन्ज मेडल जीता। अब भारत के कुल मेडल की संख्या 10 हो गई है।
पांचवे दिन का सबसे यादगार पल पैरा एथलेटिक्स का रहा, जब शर्मिला धनखड़ ने महिलाओं के शॉट पुट F57 इवेंट में 9.81 मीटर का सीजन का सबसे अच्छा थ्रो फेंककर गोल्ड मेडल जीता। शर्मीला पैरा एथलेटिक्स में भारत की पहली कॉमनवेल्थ गेम्स गोल्ड मेडलिस्ट बनीं।
भारत का यह जश्न उस समय दोगुना हो गया शिल्पा के शायला ने चौथे स्थान से ब्रॉन्ज मेडल मिला। इस तरह भारत को ग्लासगो गेम्स में पहली बार डबल पोडियम फिनिश मिला। शिल्पा को यह जीत नाइजीरिया की यूकारिया इयाज़ी के डिसक्वालिफ़िकेशन के बाद मिली।
भारतीय एथलेटिक्स में नेशनल रिकॉर्ड होल्डर सर्वेश कुशारे ने पुरुषों की हाई जंप में सिल्वर मेडल जीता। कुशारे ने 2.25मी. की दूरी तय की, लेकिन काउंटबैक में गोल्ड मेडल से चूक गए। जमैका के रोमेन बेकफोर्ड ने भी उतनी ही ऊंचाई तय की, लेकिन सीरीज में उनका प्रदर्शन बेहतर रहा। इंग्लैंड के किमानी जैक ने 2.20मी. के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।
भारत के लिए सबसे फलदायक खेल वेटलिफ्टिंग साबित हुआ। यहाँ देश को तीन और मेडल मिलने के बाद पांचवे दिन मेडल की संख्या छह हो गई। ज्ञानेश्वरी यादव ने कॉमनवेल्थ गेम्स 2026 में अपने डेब्यू पर महिलाओं की 53 किग्रा कैटेगरी में सिल्वर जीतकर भारत का खाता खोला। 23 साल की ज्ञानेश्वरी ओलंपिक चैंपियन मीराबाई चानू को शामिल करने के लिए 49 किग्रा डिवीजन से ऊपर आई थीं। उन्होंने 199 किग्रा (स्नैच में 88kg और क्लीन एंड जर्क में 111kg) का पर्सनल बेस्ट टोटल उठाया। उन्होंने अपनी सभी छह कोशिशें सफलतापूर्वक पूरी कीं और कुछ समय के लिए कॉमनवेल्थ गेम्स का क्लीन एंड जर्क रिकॉर्ड अपने नाम किया। बताते चलें कि इससे पहले नाइजीरिया की ओनोमे ओमोलोला डिडिह ने 206 किग्रा के गेम्स-रिकॉर्ड टोटल के साथ गोल्ड जीतकर इसे तोड़ दिया।
महिलाओं की 58किग्रा. कैटेगरी में बिंद्यारानी देवी ने ब्रॉन्ज मेडल जीतकर लगातार दूसरा कॉमनवेल्थ गेम्स मेडल जीता। चार साल पहले भी वह बर्मिंघम में सिल्वर मेडल जीत चुकी हैं। उन्होंने कुल 199 किग्रा (स्नैच में 87kg और क्लीन एंड जर्क में 112kg) वजन उठाया, जबकि नाइजीरिया की राफियातु फोलाशडे लावल ने गेम्स-रिकॉर्ड कुल 229kg के साथ अपना टाइटल बचाया और कनाडा की एन सोफी टैशेरेउ ने 215kg के साथ सिल्वर मेडल जीता।
पांचवे दिन का आखिरी वेटलिफ्टिंग इवेंट भी सुखद रहा। इसमें 22 साल के वल्लूरी अजय बाबू पुरुषों के 79 किग्रा कॉम्पिटिशन में गोल्ड मेडल से चूक गए। आंध्र प्रदेश के इस लिफ्टर ने स्नैच में 149 किग्रा का कॉमनवेल्थ गेम्स रिकॉर्ड बनाया। उन्होंने कुल 330 किग्रा (149 किग्रा.+181 किग्रा.) के साथ खत्म किया। मलेशिया के मुहम्मद एरी हिदायत ने 184kg के गेम्स-रिकॉर्ड क्लीन एंड जर्क के बाद 331 किग्रा. के साथ गोल्ड मेडल जीता, जबकि स्कॉटलैंड के क्रिस मरे ने 325kg के साथ ब्रॉन्ज मेडल जीता।