अमरीका के बाद भारत साइबर अपराध के मामले में दूसरे नंबर पर है। यह जानकारी मेटा की Adversarial Threat Report 2026 के जरिए सामने आई है। रिपोर्ट में एआई का तेजी से होने वाले इस्तेमाल को बढ़ते साइबर अपराध का कारण बताया गया है।
मेटा द्वारा हाल ही में Adversarial Threat Report 2026 की जारी रिपोर्ट के मुताबिक़, साइबर स्कैम करने वालों का दूसरा सबसे बड़ा निशाना भारत है। रिपोर्ट में साइबर अपराधों द्वारा आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस के बढ़ते इस्तेमाल के बारे में भी बताया गया है। साइबर अपराधियों के निशाने के मामले में रिपोर्ट में स्थान अमरीका का है।
साइबर अपराधी एआई के माध्यम से फिशिंग घोटाले कर रहे हैं, जिससे उनकी पहचान करना आसान नहीं होता। वहीँ साइबर अपराध के चलते भारत में वित्तीय नुकसान में भी तेजी से बढ़ोतरी हुई है। साल 2024 लगभग 22 हजार करोड़ रुपये से अधिक का नुकसान सामने आया था।
मेटा के मुताबिक़, अब साइबर अपराधी ग्रुप में काम को अंजाम देते हैं। ये ग्रुप किसी प्रोफेशनल कंपनी की तरह काम करते हैं। साइबर अपराधी सोशल मीडिया, मैसेजिंग प्लेटफॉर्म और डिजिटल टूल्स का इस्तेमाल करके अपने शिकार को पहचानते हैं और बड़े पैमाने पर फ्रॉड करते हैं।
रिपोर्ट से पता चलता है कि साइबर धोखाधड़ी में असली नज़र आने वाले मैसेज, फेक प्रोफाइल और फिशिंग वेबसाइट के अलावा डीपफेक टेक्नोलॉजी के जरिए असली और छेड़छाड़ किए गए कंटेंट के बीच अंतर को भी खत्म कर दिया है। एआई की दुनिया में न्यूडिफाई ऐप्स का गलत इस्तेमाल भी अब एक बड़ा खतरा बन गया है। ये टूल्स बिना किसी की मर्जी के नकली अश्लील तस्वीरें बना सकते हैं।
मेटा की यह रिपोर्ट भारत में यूजर्स को डिजिटल जागरूकता के महत्व को सामने लाती है। यूज़र्स में अभी भी ऑनलाइन जोखिम की समझ नहीं है और ऐसे में अधिकतर यूज़र असुरक्षित हैं। इसके लिए ज़रूरी है कि इंटरनेट का इस्तेमाल करते समय सुरक्षित रहने रहने संबंधी दिशा निर्देशों पर ध्यान दिया जाए ताकि साइबर क्राइम को घटाया जा सके।
