भारत राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर इसरो ने पेश किया भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल

23 अगस्त 2025 को भारत राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है। दो साल पहले भारतीय स्पेस एजेंसी ने आज ही के दिन चांद के साउथ पोल पर सफलतापूर्वक सैटेलाइट लॉन्च किया था। भारत इस उपलब्धि को हासिल करने वाला दुनिया का पहला देश बना था।

भारत राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर इसरो ने पेश किया भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन का पहला मॉड्यूल

भारत आज दूसरा राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस मना रहा है। उसके बाद से प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने 23 अगस्त को राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस घोषित कर दिया। इस उपलक्ष्य में नई दिल्ली में स्थित भारत मंडपम में दो दिन से जश्न का कार्यक्रम चल रहा है।

इसरो ने इस अवसर पर भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन (BAS) के पहले मॉड्यूल BAS-01 का मॉडल पेश किया। भारत मंडपम में इसे 3.8 मीटर x 8 मीटर क्षेत्र में रखा गया है। विज्ञान में रुचि रखने वाला हरेक भारतीय इस मॉडल का इंतजार कर रहा था।


राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर इसरो के अध्यक्ष वी नारायणन ने बताया कि 2028 तक ‘भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन’ का पहला मॉड्यूल लॉन्च किया जाएगा, जो 2035 तक पूरी तरह से चालू हो जाएगा।


गौरतलब है कि वर्तमान में अंतरिक्ष में केवल दो स्पेस स्टेशन्स चल रहे हैं। इनमें एक इंटरनेशनल स्पेस स्टेशन है, जिसे अमरीका स्पेस एजेंसी नासा समेत कुल पांच देशों की एजेंसिया मिलकर चला रही है। इनमें दूसरा जो अंतरिक्ष में घूम रहा है वह चीन का Tiangong स्पेस स्टेशन है। भारत भी अब इस क्रम में एक्सक्लूसिव लिस्ट का हिस्सा बनने की तैयारी कर रहा है।

बताते चलें कि भारत का इरादा 2028 तक BAS-01 को लॉन्च करना है और 2035 तक पूरे पाँच मॉड्यूल्स से स्टेशन को एक्सपैंड करने का है। इसरो ने दूसरे राष्ट्रीय अंतरिक्ष दिवस पर जो मॉडल दिखाया है, उसका वजन करीब 10 टन है और वो 450 किलोमीटर ऊँचाई पर पृथ्वी की कक्षा में परिक्रमा।

इसके निर्माण में कई देसी टेक्नोलॉजीज़ का इस्तेमाल किया गया है। भारतीय अंतरिक्ष स्टेशन के लिए इस्तेमाल की गई ये सभी तकनीक भारत में ही निर्मित हुई हैं। यही कारण है कि यह बेहद महत्वपूर्ण होने के साथ गर्व की भी बात है।

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