भारत-जर्मनी के बीच व्यापर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर

भारत और जर्मनी के बीच द्विपक्षीय व्यापार 50 अरब डॉलर के आंकड़े को पार कर गया है, जो कि अब तक का सबसे उच्चतम स्तर है। दोनों देशों ने सोमवार को रक्षा, व्यापार, महत्वपूर्ण खनिजों और सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के उपायों की घोषणा की।

भारत-जर्मनी के बीच व्यापर अब तक के सबसे उच्चतम स्तर पर

इस बीच प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने संयुक्त रूप से बढ़ती भूराजनीतिक चुनौतियों से निपटने के लिए द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने का संकल्प लिया। प्रधानमंत्री ने कहा कि भारत और जर्मनी रिन्यूएबल एनर्जी और क्लाइमेट एक्शन में एक जैसी प्राथमिकताएं शेयर करते हैं। साथ ही उन्होंने दोनों देशों की कंपनियों को शामिल करने वाले एक नए मेगा ग्रीन हाइड्रोजन प्रोजेक्ट एनर्जी को भविष्य के लिए गेम चेंजर बताया।

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी और जर्मन चांसलर फ्रेडरिक मर्ज की उपस्थिति में रणनीतिक साझेदारी को आगे बढ़ाते हुए कई बड़े समझौता ज्ञापन (एमओयू) साइन किए हैं। इस दौरान दोनों पक्षों ने रक्षा औद्योगिक सहयोग के लिए एक रोडमैप और उच्च शिक्षा क्षेत्र में सहयोग बढ़ाने के लिए एक रोडमैप सहित 19 समझौतों पर हस्ताक्षर किए। बताते चलें कि दूरसंचार क्षेत्र में सहयोग को लेकर एक अलग समझौता भी किया गया।


प्रधानमंत्री मोदी ने कहा कि उच्च शिक्षा पर व्यापक रोडमैप शिक्षा क्षेत्र में साझेदारी को एक नयी दिशा देगा। उन्होंने जर्मन विश्वविद्यालयों को भारत में अपने परिसर खोलने के लिए आमंत्रित किया।


प्रधानमंत्री मोदी ने बताया कि दोनों देशों के बीच पिछले कुछ वर्षों में टेक्नोलॉजी कोऑपरेशन लगातार बढ़ा है और अब यह जॉइंट प्रोजेक्ट्स और इन्वेस्टमेंट के जरिए जमीन पर भी दिख रहा है। प्रधानमंत्री ने आगे बताया कि करीब दो हजार से ज्यादा जर्मन कंपनियां भारत में काम कर रही हैं, यह कंपनियों का भारत में विश्वास और यहां मौजूद अवसरों को दिखाता है।

भारत में अपने कैंपस खोलने के लिए जर्मन यूनिवर्सिटीज को आमंत्रित करते हुए प्रधानमंत्री ने चांसलर फ्रेडरिक मर्ज ने भारत और यूरोपियन यूनियन के बीच फ्री ट्रेड एग्रीमेंट करने के महत्व का ज्रिक करते हुए कहा कि ऐसा समझौता भारत-जर्मनी आर्थिक संबंधों की पूरी क्षमता को सामने लाने में मदद करेगा।

दोनों देशों ने इंडिया-जर्मनी सेंटर ऑफ एक्सीलेंस बनाने का फैसला किया है जो इन क्षेत्रों में कोऑपरेशन को मजबूत करेगा। यह सेंटर ज्ञान, टेक्नोलॉजी और इनोवेशन शेयर करने के लिए एक प्लेटफॉर्म के तौर पर काम करेगा। बताते चलें कि दोनों पक्ष क्लाइमेट, एनर्जी, शहरी विकास और शहरी मोबिलिटी से जुड़े प्रोजेक्ट्स पर भी मिलकर काम कर रहे हैं।

खेल और शिक्षा के क्षेत्र में भी दोनों नेताओं ने सहयोग बढ़ाने पर रज़ामंदी जताई। प्रधानमंत्री मोदी का इस पर कहना है कि खेल दोनों देशों के युवाओं को जोड़ने में मदद करेंगे, जबकि उच्च शिक्षा पर एक नया रोडमैप एकेडमिक संबंधों को मजबूत करेगा।

भारत-यूरोपीय संघ (ईयू) मुक्त व्यापार समझौते को शीघ्र अंतिम रूप देने की वकालत के साथ दोनों नेताओं ने भारत और जर्मनी के लोगों के बीच संबंधों को बढ़ावा देने के लिए भारतीय पासपोर्ट धारकों के वास्ते जर्मनी से गुजरने के लिए वीजा-मुक्त पारगमन की घोषणा भी की।

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