वरिष्ठ अभिनेता पंकज कपूर एक बेहतरीन कलाकार होने के साथ एक शानदार इंसान भी हैं। हाल ही में उन्होंने एक इंटरव्यू में अपनी सादा ज़िंदगी के कुछ राज़ खोले।

इस लोकप्रिय कलाकार का कहना है ज़िंदगी को लेकर वह 99.9% संतुष्ट हैं। हालांकि अपनी निराशा के पहलू पर बताते हुए उन्होंने स्वीकार किया कि उन्हें मेनस्ट्रीम स्टार्स के लिए आरक्षित तरह के लीड रोल नहीं मिले।
पंकज ने अपने अंदर की प्रतिभा के लिए आभार व्यक्त किया और माना कि वह मुंबई में एक अच्छी, मिडिल क्लास ज़िंदगी जीते हैं। उन्होंने इस बात पर ज़ोर दिया कि वह एक साधारण एक्टर है न कि स्टार। अपने पेशे के हवाले से उनका कहना है कि इसने उन्हें एक इज्जतदार ज़िंदगी जीने में मदद की है।
अपनी पूरी हो चुकी इच्छा के बारे में पंकज का कहना है कि 1990 के दशक में अपने करियर के पीक पर भी उन्होंने सिर्फ एक ही चीज़ के लिए प्रार्थना की थी कि स्टारडम की वजह से होने वाली परेशानियों के बिना पहचान। आखिर उन्हें लोगों से पहचान मिली। इस ज़िंदगी में पंकज उस हलचल से दूर हैं जो सामान्य ज़िंदगी को खराब कर देती है।
समकालीन कलाकारों से आर्थिक तुलना पर कपूर ने स्वीकार किया कि उन्हें यकीन है कि उन्होंने उनसे ज़्यादा पैसे कमाए। खुद को बहुत सेलेक्टिव बताते हुए वह यह भी कहते हैं कि मैं मुंबई के हिसाब से आराम से जीता हूं और इस बात पर शुक्र अदा करते हैं कि हमेशा अपने पैरों पर खड़े रहे।
पंकज कहते हैं कि उन्होंने कभी भी विलासिता के पीछे नहीं भागना चाहा और न ही छह कारें और 12 घर की ख्वाहिश की। बल्कि जो भी उनके पास रहा उसी से संतुष्ट रहे। अपने पिता को धन्यवाद देते हुए पंकज कहते हैं कि उस समय जब एक्टिंग करना आम बात नहीं थी, तब लुधियाना से मुंबई जाकर एक्टिंग करने के उनके सपने का समर्थन उन्हें पिता से मिला।
अंत में वह कहते हैं कि मुझे कभी वह नहीं चाहिए था जो दूसरों को चाहिए था। उनके अनुसार, उन्हें बस एक्टिंग करनी थी और उन्होंने वही किया। पंकज कपूर के अभिनय की बात करें तो छोटे परदे पर करमचंद और ऑफिस ऑफिस जैसे यादगार शो के अलावा बड़े परदे की जाने भी दो यारों, एक डॉक्टर की मौत, माक़बूल और राख जैसी बेहतरीन फिल्मों में उन्होंने काम किया है।
















