ठंड के दिनों में अलाव या हीटर की आदत किसी नशे से कम नहीं। लेकिन अकसर यह हमारी सुरक्षा के लिए बड़ा खतरा बन जाता है। यह शौक़ एक ‘साइलेंट किलर’ की तरह है। दरअसल अलाव या गर्माहट के इंतिज़ाम बंद कमरे में ऑक्सीजन को खत्म करने के साथ कार्बन मोनोऑक्साइड गैस बनाते है, जो रंगहीन और गंधहीन है। इसे सांस लेने पर शरीर में ऑक्सीजन नहीं पहुंचती, नतीजे में नींद में बेहोशी और बाद में मौत हो सकती है।

सर्दियों के मौसम में ख़बरों में कई घटनाएं सामने आती हैं, जब रात भर बंद कमरे में अंगीठी जलाने या हीटर चलाने के कारण पूरे परिवार की मौत का पता चलता है। इसका मुख्य कारण है कार्बन मोनोऑक्साइड (CO) गैस है। डब्ल्यूएचओ के मुताबिक, कार्बन मोनो ऑक्साइड का सामान्य स्तर पॉइंट 3.5 PPM है लेकिन जब यह स्तर 100 से ऊपर हो जाता है तो मानव स्वास्थ्य के लिए बेहद हानिकारक होता है।
कार्बन मोनोऑक्साइड गैस रंगहीन और गंधहीन होती है, इसलिए इसे महसूस करना मुश्किल होता है। यह फेफड़ों के जरिए खून में मिलकर हीमोग्लोबिन से जुड़ जाती है, जिससे शरीर में ऑक्सीजन की आपूर्ति रुक जाती है। ऐसे में इंसान नींद में ही बेहोश हो जाता है और ऑक्सीजन न मिलने पर उसकी मौत भी हो सकती है।
इसके अलावा अलाव या हीटर कमरे की नमी को सोख लेता है। इससे त्वचा में रूखापन और आंखों में जलन जैसी समस्याएं हो सकती हैं। इस हवाले से अब कंपनियां ऐसे हीटर भी ला रही है जो वातावरण में नमी बनाए रखता है, मगर उसकी अपनी स्वास्थ्य समस्याए हैं। मोनो ऑक्साइड गैस हार्टअटैक का कारण भी बन सकती है। इसके अलावा इस गैस से कई बीमारियां हो सकती हैं।
ऑक्सीजन की कमी से सिरदर्द, चक्कर और कमजोरी जैसी शिकायतें होती हैं। साथ ही अस्थमा या ब्रोंकाइटिस के मरीजों के लिए यह हवा और भी हानिकारक होती है। ऐसे में ज़रूरी है कि बहुत ज़्यादा ज़रूरत प्रयोग किया जाए और प्रयोग के समय वेंटिलेशन का ध्यान रखा जाए।
सोने से पहले अलाव को बुझा दें, हीटर का स्विच ऑफ करें या अंगीठी को कमरे से बाहर रख दें। इसे रात भर जलाकर सोना जानलेवा साबित हो सकता है।













