अब ट्रेन रवाना होने से पहले वाला रिजर्वेशन चार्ट 8 घंटे पहले तैयार किया जाएगा। इससे यात्रियों को टिकट कन्फर्म न होने की दशा में यात्रा की व्यवस्था के लिए अतिरिक्त समय मिल सकेगा। अभी तक यह चार्ट 4 घंटे पहले तैयार किया जाता था। इन बदलावों का उद्देश्य टिकट बुकिंग में पारदर्शिता लाना और दलालों या फर्जी एजेंट्स की मनमानी पर रोक लगाना है।

रेलवे बोर्ड द्वारा इन बदलावों की जानकारी जल्द ही फेज वाइज लागू की जाएगी। रेल मंत्री अश्विनी वैष्णव की अध्यक्षता में हुई समीक्षा बैठक के बाद यह फैसला लिया गया। इस बदलाव से वेटिंग लिस्ट वाले यात्रियों को अपनी टिकट की स्थिति पहले पता चल सकेगी, जिससे वे अपनी यात्रा की बेहतर योजना बना सकेंगे।
इसके अलावा रेलवे अपना पैसेंजर रिजर्वेशन सिस्टम (PRS) भी दिसंबर 2025 तक पूरी तरह अपग्रेड करेगा। नए सिस्टम बहुत ही तेज़ रफ़्तार से बुकिंग प्रक्रिया में योगदान देगा। इस सिस्टम के आने से एक मिनट में 1.5 लाख टिकट बुकिंग किये जा सकेंगे। बताते चलें कि वर्तमान में यह संख्या 32 हजार है जो नई व्यवस्था आने पर पांच गुना ज्यादा रफ़्तार से करेगा।
इसके अलावा नए पीआरएस मल्टी-लैंग्वेज और यूजर-फ्रेंडली की मदद से सीट चुनने, फेयर कैलेंडर देखने और दिव्यांग, स्टूडेंट्स या मरीजों के लिए खास सुविधाएं मिल सकेंगी।
भारतीय रेलवे ने पहली मई से लागू बदलाव में वेटिंग टिकट यात्रियों के लिए नए नियम लागू किए थे। जिसके तहत वेटिंग लिस्ट टिकट वाले यात्रियों को स्लीपर या ऐसी कोच में यात्रा करने की इजाज़त थी मगर इस सुविधा को फिर से समाप्त कर दिया गया है।
अब वेटिंग लिस्ट वाले यात्री अब केवल जनरल कोच में ही सफर कर सकेंगे। यदि कोई यात्री वेटिंग टिकट पर ऐसी या स्लीपर कोच में यात्रा करता हुआ पाया जाता है, तो उस पर जुर्माना लगेगा।
ऐसी के लिए जुर्माना राशि 440 रुपये जबकि स्लीपर के यह राशि 250 रुपए है। इसके अलावा पैसेंजर को ट्रेन के शुरुआती स्टेशन से लेकर उस स्टेशन तक का किराया देना होगा, जहां उसे पकड़ा गया है।
यद् दिला दें कि पहली जुलाई 2025 से तत्काल टिकट बुकिंग के लिए रेलवे की वेबसाइट या एप पर आधार ऑथेंटिकेशन जरूरी होगा। इसके अलावा 15 जुलाई से ऑनलाइन तत्काल बुकिंग के लिए आधार नंबर से जुड़ा ओटीपी भी लगेगा। इन बदलावों का उद्देश्य टिकट बुकिंग में पारदर्शिता लाना और दलालों या फर्जी एजेंट्स की मनमानी पर रोक लगाना है।















