पहली नवंबर 2025 से सरकार द्वारा बैंक खातों में चार नॉमिनी जोड़ने की सुविधा लागू कर दी गई है। अब ग्राहक प्राइमरी और सक्सेसिव नॉमिनी तय कर सकेंगे। जिससे मृत्यु के बाद पैसा सही हक़दार तक जल्दी पहुंचेगा। आरबीआई ने यह भी तय किया है कि सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के 15 दिनों के भीतर बैंक को दावा निपटाना होगा। इससे परिवार को कोर्ट या कानूनी प्रक्रिया के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।

इस नियम के तहत चार नॉमिनी जोड़ने की सुविधा का विकल्प अब सेविंग्स और एफडी दोनों में मिलेंगे, जबकि लॉकर में केवल सक्सेसिव नॉमिनेशन मान्य होगा।
सरकार द्वारा पहली नवंबर, 2025 से नए बैंकिंग नॉमिनेशन नियम लागू किए जाने का मकसद खाताधारक की मृत्यु के बाद परिवार को पैसा मिलने की प्रक्रिया को तेज और सरल बनाना है। इस सुविधा से कई विवादों से बचा जा सकेगा।
नए नियमों के अनुसार, अब चार नॉमिनी जोड़ने की सुविधा है। हर खाते में अब ग्राहक प्राइमरी और सक्सेसिव नॉमिनी जोड़ सकेंगे। इससे यह तय होगा कि उसके निधन के बाद बैंक सबसे पहले पैसा किसे देगा और अगर वह व्यक्ति न रहे, तो अगला कौन होगा। इसके अलावा अब सेविंग्स और फिक्स्ड डिपॉजिट खातों में चार नॉमिनी जोड़ने की सुविधा होगी।
प्राइमरी नॉमिनी किसे बनाएं
जिसे बैंक सबसे पहले भुगतान करता है, वह प्राइमरी नॉमिनी होता है। सक्सेसिव नॉमिनी तभी प्रभावी होता है, जब पहला नॉमिनी जीवित न हो। इस तरह ग्राहक अब चार नॉमिनी के नाम जोड़ सकता है। आरबीआई ने यह भी तय किया है कि सभी जरूरी दस्तावेज मिलने के 15 दिनों के भीतर बैंक को दावा निपटाना होगा। इससे परिवार को कोर्ट या कानूनी प्रक्रिया के लिए भागदौड़ नहीं करनी पड़ेगी।
ऐसे में ज़रूरी है कि नामिनी तय करते समय आप अपने जीवनसाथी या मुख्य आश्रित को प्राइमरी नॉमिनी बनाएं और बच्चों या अन्य रिश्तेदारों को सक्सेसिव नॉमिनी के रूप में रखें। इसके साथ ही हर बड़े बदलाव (शादी, बच्चे का जन्म या किसी की मृत्यु) के बाद नॉमिनेशन अपडेट करें।
याद रखें कि चार नॉमिनी जोड़ने का उद्देश्य परिवार को आर्थिक सुरक्षा देना है। अगर पहला नॉमिनी नहीं है, तो अगला तुरंत अधिकार पा लेगा। बैंक को पहले से पता रहेगा कि पैसा किस क्रम में देना है, जिससे विवाद कम होंगे।
बताते चलें कि लॉकर और सेफ कस्टडी सेवाओं में सिर्फ सक्सेसिव नॉमिनेशन की अनुमति है। यानी आप क्रम से नाम लिखेंगे, जैसे पहला नॉमिनी पत्नी, फिर बेटा, फिर बेटी। इनमें पहला जीवित व्यक्ति ही वैध नॉमिनी माना जाएगा और उसी को अधिकार मिलेगा।














