सुप्रीम कोर्ट ने बीते दिन आवारा कुत्तों से जुड़े एक मामले की सुनवाई करते हुए इस पर कड़ी और गहरी टिप्पणी की और पूछा कि लोग कब तक कुत्तों से परेशान होते रहेंगे। कोर्ट ने कहा कि आवारा कुत्तों की वजह से एक्सीडेंट का भी खतरा रहता है।

सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि सड़कों को कुत्तों से साफ और खाली होना चाहिए। मुमकिन है वे न काटें, लेकिन वे हादसों की वजह बनते हैं। सुप्रीम कोर्ट ने इशारा किया कि यह मामला सिर्फ जानवरों की सुरक्षा का नहीं है, बल्कि इंसानी जान और पब्लिक सेफ्टी का भी है। अगली सुनवाई 8 जनवरी को सुबह 10:30 बजे होगी।
बेंच ने स्कूल, हॉस्पिटल और कोर्ट परिसर में आवारा कुत्तों की ज़रूरत पर सवाल उठाया। करीब ढाई घंटे तक चली सुनवाई के दौरान “मोड,” “काउंसलिंग,” “कम्युनिटी डॉग्स,” और “इंस्टीट्यूशनलाइज्ड डॉग्स” जैसे शब्दों पर भी चर्चा हुई। उन्हें हटाने पर किसे और क्यों एतराज़ होगा? कोर्ट ने कहा कि इन परिसरों में बच्चों, बुज़ुर्गों और आम नागरिकों की सुरक्षा सबसे ज़रूरी है।
सीनियर वकील कपिल सिब्बल ने आवारा कुत्तों के पक्ष में दलील देते हुए कहा कि कोई भी कुत्ता जो काटता है, उसे स्टरलाइज़ किया जा सकता है। इस पर सुप्रीम कोर्ट ने सख्ती से जवाब दिया, “अब बस इतना ही बाकी है कि कुत्तों को यह सलाह दी जाए कि जब उन्हें छोड़ा जाए तो वे काटें।” कपिल सिब्बल की इस दलील पर कि उन्हें मंदिरों या पब्लिक जगहों पर कुत्तों ने कभी नहीं काटा, कोर्ट ने जवाब दिया, “आप लकी हैं, लोगों को काटा जा रहा है, बच्चों को काटा जा रहा है, और लोग मर रहे हैं।”
कोर्ट ने सरकार से पूछा कि 2018 में जारी सख्त एनिमल बर्थ कंट्रोल (ABC) गाइडलाइंस का ठीक से पालन क्यों नहीं किया गया। नियम-कानून लागू करने में देरी से जनता को नुकसान नहीं होना चाहिए













