हीटवेव ने दुनियाभर की झीलों में सतही ऑक्सीजन की मात्रा को प्रभावित किया है- शोध

एक अध्ययन से पता चला है कि 83 प्रतिशत झीलों में ऑक्सीजन की कमी हो रही है, जो वैश्विक जलवायु परिवर्तन के प्रभाव को दर्शाता है।

हीटवेव ने दुनियाभर की झीलों में सतही ऑक्सीजन की मात्रा को प्रभावित किया है- शोध

नीति निर्माताओं और पर्यावरण प्रबंधकों के लिए महत्वपूर्ण जानकारी प्रदान करने वाला यह लेख मीठे पानी में ऑक्सीजन की गिरती मात्रा के संकट से निपटने के लिए आवश्यक कदम उठाए जाने की बात करता है।चीन के नानजिंग विश्वविद्यालय तथा ब्रिटेन के बांगोर विश्वविद्यालय के वैज्ञानिकों द्वारा किया जाने वाला यह अध्ययन साइंस एडवांस जर्नल में प्रकाशित हुआ है।


जलवायु परिवर्तन से मीठे पानी के पारिस्थितिकी तंत्र पर पड़ने वाला प्रभाव चिंताजनक है। शोधकर्ता कहते हैं कि दुनियाभर की झीलों और जल संसाधनों को बचाने के लिए तत्काल प्रभावी कदम उठाए जाने की आवश्यकता है।


महासागरों और नदियों की तुलना में झीलों में ऑक्सीजन की कमी अधिक तेज गति से देखी गई है, जो बेहद चिंताजनक है। गर्म होते वैश्विक तापमान के कारण ऑक्सीजन की घुलनशीलता में आने वाली कमी से 55% सतही ऑक्सीजन की हानि हुई है। वहीं, यूट्रोफिकेशन के बढ़ने से कुल वैश्विक सतही ऑक्सीजन की हानि भी लगभग 10% हुई है।

इसके लिए शोधकर्ताओं ने पिछले 20 वर्षों में 15 हज़ार से अधिक झीलों की सतह में घुली ऑक्सीजन के स्तर का विश्लेषण करने के लिए व्यापक डाटा सेट और मॉडलिंग तकनीकों का उपयोग किया। अध्ययन के निष्कर्ष बताते हैं कि 83 फीसदी झीलों में ऑक्सीजन की भारी कमी देखी गई, जिसे डीऑक्सीजनेशन कहा जाता है।

दरअसल हीटवेव से झीलों में सतही ऑक्सीजन घटी घटने से जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए गंभीर संकट के हालात जन्म ले रहे हैं। जलवायु परिवर्तन और हीटवेव की वजह से झीलों में सतही ऑक्सीजन का स्तर तेजी से घट रहा है। इसके नतीजे में जीव-जंतुओं और वनस्पतियों के लिए गंभीर संकट पैदा हो रहा है।

जलवायु परिवर्तन और बढ़ती हीटवेव के चलते वैश्विक स्तर पर झीलों की सतह पर घुली ऑक्सीजन के स्तर में तेजी से गिरावट आ राइ है। यह झीलों में रहने वाले जीव-जंतुओं सहित वनस्पतियों के लिए बेहद खतरनाक और चिंताजनक है।

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