स्वास्थ्य मंत्रालय ने विभिन्न कंपनियों की 111 दवाओं को गुणवत्ता के अनुरूप नहीं पाया है। यह जानकारी मंत्रालय द्वारा जांच के बाद सामने आई है।
स्वास्थ्य मंत्रालय ने जिन 111 दवाओं को गुणवत्ता के अनुरूप नहीं माना है, दरअसल नवंबर महीने में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं के साथ-साथ राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा इन दवाओं को एनएसक्यू यानी मानक गुणवत्ता के रूप में नहीं पाया गया है।
स्वास्थ्य मंत्रालय द्वारा जारी एक बयान में कहा गया है कि दवा नियामकों द्वारा यह सुनिश्चित करने के लिए कार्रवाई की जा रही है। आगे यह आदेश भी दिया गया है कि इन दवाओं की पहचान की जाए और उन्हें बाजार से हटाया जाए।
मंत्रालय ने कहा- “राज्यों से केंद्रीय डेटाबेस में एनएसक्यू/नकली पहचान की बढ़ती रिपोर्टिंग से देश और उसके बाहर गुणवत्तापूर्ण दवाओं की उपलब्धता में सुधार करने में मदद मिलेगी।”
जो दवाएं मानक गुणवत्ता की नहीं तथा नकली पाई गईं, उनका उपयोग मुख्य रूप से रक्त शर्करा नियंत्रण, अल्सर उपचार तथा एलर्जी के उपचार के लिए किया जाता है।
मंत्रालय के मुताबिक़ नवंबर में केंद्रीय औषधि प्रयोगशालाओं ने 41 दवा नमूनों की पहचान मानक गुणवत्ता के की बात कही है। जबकि राज्य औषधि परीक्षण प्रयोगशालाओं द्वारा 70 दवा नमूनों की पहचान मानक गुणवत्ता के नहीं होने के रूप में की है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, एनएसक्यू और नकली दवाओं की पहचान के लिए राज्यों के नियामकों के सहयोग से इन दवाओं की नियमित रूप से जाँच की जाती है। इससे यह सुनिश्चित करने में सहायता मिलती है कि ऐसी दवाओं की पहचान करने के बाद उन्हें बाजार से हटाया जाए।
नियमित विनियामक निगरानी गतिविधि के अनुसार, मानक गुणवत्ता की नकली दवाओं की सूची हर महीने CDSCO पोर्टल पर प्रदर्शित की जाती है। मंत्रालय ने कहा, “NSQ के रूप में दवा के नमूनों की पहचान एक या दूसरे निर्दिष्ट गुणवत्ता मापदंडों में दवा के नमूने की विफलता के आधार पर की जाती है।
मंत्रालय ने कहा- “ये दोनों दवाएँ अनधिकृत और अज्ञात निर्माताओं द्वारा अन्य कंपनियों के स्वामित्व वाले ब्रांड नामों का उपयोग करके बनाई गई हैं। मामले में जाँच शुरू कर दी गई है।”
मंत्रालय ने कहा कि इस महीने की एनएसक्यू रिपोर्टिंग में केंद्रीय डेटाबेस में एनएसक्यू की रिपोर्टिंग में राज्यों की बढ़ती भागीदारी देखी गई है।