उत्तर प्रदेश में पत्रकारों के साथ बर्बरता जारी

पत्रकारों के साथ बर्बरता जारी, ट्रेन हादसे को कवर करने गए पत्रकार की जमकर पिटाई, वीडियो वायरल
उत्तर प्रदेश के शामली जिले में एक पत्रकार की पिटाई का मामला सामने आया है। पत्रकार को पीटने का आरोप जीआरपी के पुलिसवालों पर लगा है। इस मामले में 2 पुलिसकर्मियों को सस्‍पेंड किया गया है।

योगी सरकार में पत्रकारों के साथ पुलिसिया बर्बरता थमने का नाम नहीं ले रहा है। पत्रकार प्रशांत के मामले में सुप्रीम कोर्ट की फटकार के बाद चौतरफा आलोचना झेल रही यूपी के मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ के राज में फिर एक पत्रकार के साथ पुलिस की बर्बरता हुई है।

ताजा मामला शामली का है। शामली में एक निजी चैनल के पत्रकार अमित शर्मा को वर्दीवालों ने बुरी तरह से पीटा है। साथ ही उसके साथ अमानवीय हरकत किया गया। दरअसल, मंगलवार देर रात शामली में मालगाड़ी के पटरी से उतरने की घटना का कवरेज करने गया था। इसके बाद अमित शर्मा को रेलवे पुलिसकर्मियों ने बुरी तरह पीटा। पिटाई का वीडियो वहां मौजूद अन्य पत्रकारों के कैमरे में कैद हो गया है जो सोशल मीडिया पर वायरल हो रहा है।

वीडियो में साफ दिखाई दे रहा है कि रेलवे पुलिसकर्मी अमित शर्मा को बुरी तरह पीट रहा है। कभी लात कभी घुसे मार रहा है, ये सब कुछ शामली में जीआरपी के एसएचओ राकेश कुमार की मौजूदगी में हो रहा है। खुद एसएचओ अमित शर्मा का कॉलर पकड़े हुए हैं।

पत्रकार ने आरोप लगाया है कि पुलिसवाले उनसे कैमरा छीनने लगे और कैमरा नीचे गिर गया। वह कैमरा उठाने के लिए झुके तो सादी वर्दी में एक पुलिसवाले ने पिटाई शुरू कर दी और गालियां देने लगा। बाद में इस घटना पर कार्रवाई हुई और एसएचओ को निलंबित कर दिया गया। उनके साथ कांस्टेबल को भी निलंबित कर दिया गया है। लेकिन मामला ने तूल पकड़ लिया है। जिससे एक बार फिर योगी की किरकिरी हो रही है।

इस घटना को लेकर चौरतफा निंदा हो रही है। पत्रकार प्रशांत ने ट्वीट कर कहा, “अब बहुत हुआ, यूपी पुलिस। शामली में जीआरपी पुलिस के गुर्गे द्वारा एक राष्ट्रीय समाचार चैनल के एक स्थानीय स्ट्रिंगर की पिटाई की गई। उस पत्रकार की गलती सिर्फ इतनी थी कि वो अपनी ड्यूटी को निभा रहा था। और कुछ दिनों पहले ट्रेनों में अवैध वेंडर की सांठगांठ का पर्दाफाश किया था।”

 

बता दें कि इससे पहले पत्रकार अमित शर्मा ने दिल्ली-सहारनपुर ट्रेन में जीआरपी पुलिस के कथित वेंडर्स से हफ्ता वसूली का उजागर किया था। माना जा रहा है कि इसको लेकर ही उसे निशाना बनाया गया है।

गौरतलब है कि मंगवार को पत्रकार प्रशांत कनौजिया की गिरफ्तारी को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने योगी सरकार को फटकार लगाई थी। साथ ही कोर्ट ने उसे फौरन रिहा करने का आदेश दिया था। कोर्ट ने सुनवाई के दौरान पूछा था कि आखिर उसे किस आधार पर गिरफ्तार किया गया है।

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