केंद्रीय मंत्री ने इस तरह के संकेत दिए हैं कि सरकार आने वाले वक्त में डीपफेक और सोशल मीडिया पर उम्र के आधार पर कंटेंट को लेकर कड़े रेगुलेशन ला सकती है। वैष्णव ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित किए जाने की जरूरत है।

केंद्रीय मंत्री अश्विनी वैष्णव का कहना है कि निगेटिव एआई से निपटने के लिए देशों के बीच आम सहमति पर बात जारी है। आईटी सेक्टर में अगले दो वर्ष में 200 अरब डॉलर का निवेश के साथ भारत अब एआई का यूपीआई बनाएगा। इसके साथ ही एज बेस्ड कंटेंट और डीपफेक मामले में भी सख्त रेगुलेशन के संकेत दिए गए हैं।
अश्विनी वैष्णव ने एआई इम्पैक्ट समिट में प्रेस को संबोधित करते हुए उम्र के आधार पर सोशल मीडिया कंटेंट और डीपफेक पर कड़े रेगुलेशन की बात कही है। उन्होंने इस सेक्टर में 200 अरब डॉलर यानी लगभग 18.13 लाख करोड़ रुपये तक के निवेश के साथ भारत के एआई विजन पर विस्तार से बात की। इसके तहत अब एक्स, मेटा या नेटफ्लिक्स, सभी को देश के संविधान के दायरे में काम करना होगा।
एआई इम्पैक्ट समिट के पहले दिन होने वाली अव्यवस्था को लेकर माफी मांगते वैष्णव ने हुए कहा इस संबंध में अगर किसी को शिकायत है तो वो आगे आकर रिपोर्ट कर सकते हैं।
सरकार आने वाले वक्त में डीपफेक और सोशल मीडिया पर उम्र के आधार पर कंटेंट को लेकर कड़े रेगुलेशन ला सकती है। इस बारे में केंद्रीय मंत्री ने कहा कि बच्चों को सुरक्षित किए जाने की जरूरत है। आगे उन्होंने कहा कि कई देश ये मान चुके हैं कि उम्र के आधार पर कंटेंट और एक्सेस कंट्रोल करना जरूरी है। उन्होंने यह भी कहा कि सरकार और इंडस्ट्री के बीच बात हो रही है कि अब और अब किस तरह के कड़े रेगुलेशन की जरूरत है।
इसके साथ ही उन्होंने इस देश के सांस्कृतिक ताने-बाने को समझने का महत्व भी बताया और कहा कि हर देश का ताना-बाना अलग होता है। कॉपीराइट को भी इस समझ का हिस्सा बताते हुए उनका कहना था कि पारंपरिक कंटेंट क्रिएटर्स को अपने कंटेंट का वाजिब हक मिलना चाहिए। जिसके बारे में उनका कहना है कि इस संबंध में सरकार बड़े प्लेटफॉर्म्स के साथ बात कर रही है।














