प्रोपेगेंडा के मुकाबले में पिछड़ती वैश्विक कार्रवाई: रिपोर्ट

वर्तमान में आतंकवादी समूह अपनी दुष्प्रचार रणनीतियाँ बहुत तेज़ी से बदल रहे हैं, जबकि सदस्य देशों के क़ानून और नीतियाँ उतनी तेज़ी से नहीं बदल पा रही हैं। इससे दोनों के बीच एक बढ़ता हुआ अन्तर पैदा हो गया है। रिपोर्ट


आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस रिसर्च कंपनी N-Thropic ने खुलासा किया है कि साइंटिस्ट ने संभावित बायोलॉजिकल हथियारों की रिसर्च के लिए AI मॉडल इस्तेमाल करने की कोशिश की है। N-Thropic के मुताबिक, वह यह पता नहीं लगा सका कि रिसर्च असल में बायोलॉजिकल हथियारों के डेवलपमेंट के लिए की जा रही थी या नहीं।

एन थ्रोपिक ने कहा कि बायोलॉजिकल रिसर्च से जुड़ी इन घटनाओं में शामिल रिसर्चर्स ने अपनी एक्टिविटीज़ को छिपाने और एआई सिस्टम पर लगी पाबंदियों से बचने के लिए कदम उठाए। कंपनी ने कहा कि उसने पारंपरिक हथियार बनाने के लिए क्लाउड का इस्तेमाल करने की कोशिशों का भी पता लगाया है, जिसमें फायरआर्म्स, मिसाइल, आर्म्ड ड्रोन और बम के लिए सॉफ्टवेयर शामिल हैं।

सुरक्षा परिषद की आतंकवाद-रोधी समिति के सचिवालय, CTED की रिपोर्ट बताती है कि आतंकवादी दुष्प्रचार अब केवल सन्देश फैलाने तक सीमित नहीं रहा। संयुक्त राष्ट्र की यह रिपोर्ट आगाह करती है कि आतंकवादी समूह भर्ती, धन जुटाने और हमलों की योजना बनाने तक में प्रोपेगेंडा यानी दुष्प्रचार की मदद ले रहे हैं।

रिपोर्ट से पता चलता है कि दुष्प्रचार अब उनकी गतिविधियों का अहम हिस्सा बन चुका है, जबकि सरकारें इसकी तेज़ी से बदलती रणनीतियों से निपटने में पीछे हैं। विशेष रूप से एक चिन्ताजनक रुझान की ओर ध्यान दिलाने वाली इस रिपोर्ट से पता चलता है कि बच्चों और युवाओं को बढ़ते स्तर पर निशाना बनाया जा रहा है। इनको टारगेट करने के लिए केवल सोशल मीडिया पर ही नहीं, बल्कि गेमिंग मंचों और साझा रुचियों पर आधारित ऑनलाइन समुदायों की भी मदद ली जा रही है।

रिपोर्ट के अनुसार, दुष्प्रचार लम्बे समय से आतंकवादी रणनीतियों का हिस्सा रहा है, लेकिन अब इसके इस्तेमाल और पैमाने में बड़ा बदलाव आया है. पहले की तुलना में यह कहीं अधिक केन्द्रीय, व्यापक और बदलती परिस्थितियों के अनुरूप हो गया है।

रिपोर्ट में कई नए रुझानों की ओर ध्यान दिलाया गया है, जिनमें एआई का इस्तेमाल, गेमिंग मंचों का दुरुपयोग और Discord, Twitch व Steam जैसे वैकल्पिक ऑनलाइन मंचों का इस्तेमाल शामिल है।

हथियारों के डेवलपमेंट और प्रोपेगैंडा में एआई के दूसरे गलत इस्तेमाल भी शामिल थे।बायोलॉजिकल रिसर्च से जुड़ी घटनाएं एंथ्रोपिक की एक बड़ी रिपोर्ट का हिस्सा थीं, जिसमें आठ महीने के समय में क्लाउड समेत AI सिस्टम के गलत इस्तेमाल के अलग-अलग मामलों की डिटेल दी गई थी।

रिपोर्ट के अनुसार, आतंकवादी समूह युवाओं की भर्ती के लिए गेमिंग का भी सहारा ले रहे हैं। कई समूह ऐसे हिंसक चरमपंथी वीडियो गेम बना रहे हैं, जिनमें खिलाड़ी खेल को अपने पात्र की नज़र से देखता है और हथियारों का इस्तेमाल करते हुए आगे बढ़ता है। कुछ समूह मौजूदा लोकप्रिय गेमों में भी चरमपंथी सन्देश और विचार जोड़ रहे हैं।

इसके अलावा, फाँसी के वीडियो और बड़ी संख्या में हताहत लोगों की तस्वीरों जैसी अत्यन्त हिंसक सामग्री, साथ ही हिंसा एवं निराशावादी सोच को बढ़ावा देने वाले ऑनलाइन समूह, लोगों को कट्टरपंथ की ओर धकेलने में बढ़ती भूमिका निभा रहे हैं। कंपनी ने कहा कि इसीलिए उन्होंने सावधानी बरतते हुए सबसे कड़े कदम उठाने का फैसला किया।

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