स्वास्थ्य एवं परिवार कल्याण मंत्रालय के तहत भारतीय खाद्य संरक्षा और मानक प्राधिकरण (FSSAI) ने आयुर्वेद आहार उत्पादों के लिएपोर्टल पर विशेष लाइसेंसिंग और पंजीकरण सुविधा शुरू की है। फूड सेफ्टी कंप्लायंस सिस्टम (FoSCoS) वाली इस सुविधा से अब देशभर के निर्माता पारंपरिक आयुर्वेदिक आहार उत्पादों के निर्माण और बिक्री के लिए सुगमता से लाइसेंस के लिए आवेदन कर सकते हैं।

लाइसेंस वाली यह व्यवस्था न केवल खाद्य और आयुर्वेद उद्योग को बढ़ावा देगी, बल्कि उपभोक्ताओं को प्रमाणित और सुरक्षित आयुर्वेदिक आहार उपलब्ध कराने में भी सहायक होगी।
उद्योग का यह नया प्रारूप वाला फ्रेमवर्क अब आयुर्वेद आहार क्षेत्र को औपचारिक और संगठित रूप प्रदान करेगा। एफएसएसएआई द्वारा लाए गए इस प्रारूप में प्रामाणिक आयुर्वेद ग्रंथों में उल्लिखित व्यंजनों और आहार विधियों को आधुनिक खाद्य सुरक्षा एवं गुणवत्ता मानकों के साथ जोड़ा जाएगा।
इसमें शामिल आहार की बात करें तो अलिकामत्स्य/अलिकामच्छ (काले चने के पकोड़े), अंगारकर्कटी (गेहूं के गोले-बेक्ड), दधि गुड़ (गुड़ दही), तक्र (प्रोसेस्ड छाछ), अग्निवर्धक तक्र (स्वादिष्ट छाछ), दिव्य तक्र (कपूर अदरक छाछ), वात्य मंडा (पका हुआ जौ का पानी) आदि आते हैं।
आयुर्वेद आहार का अर्थ है नियमों की ‘अनुसूची ए’ के तहत सूचीबद्ध आयुर्वेद की प्रामाणिक पुस्तकों में दिए गए विधि के मुताबिक व्यंजनों, कंपोनेंट्स या प्रक्रियाओं के आधार पर बनाया गया भोजन। इसमें आयुर्वेद आहार की अवधारणा के अनुसार अन्य वानस्पतिक कंपोनेंट्स वाले उत्पाद शामिल हैं।
बताते चलें कि इसमें आयुर्वेदिक औषधियां या स्वामित्व वाली आयुर्वेदिक औषधियां और औषधीय उत्पाद, सौंदर्य प्रसाधन, मादक (Narcotic) या मन:प्रभावी (Psychotropic) पदार्थ सम्मिलित नहीं हैं।
क्योंकि आयुर्वेद का मूल सिद्धांत ‘व्यक्तिगत पोषण’ से जुड़ा है, जिसमें आहार व्यक्ति की प्रकृति के अनुसार निर्धारित किया जाता है। एफएसएसएआई (FSSAI) की यह पहल पारंपरिक ज्ञान को आधुनिक नियामक ढांचे में शामिल कर, लोगों तक वैज्ञानिक और सुरक्षित आयुर्वेद आहार पहुंचाने की दिशा में एक बड़ी एवं महत्वपूर्ण कोशिश है।
इस उपलब्धता के साथ जहाँ एक ओर चिकित्सकों द्वारा सुझाई गई उपचार योजनाओं के प्रभाव को विस्तार मिलेगा वहीँ मानकीकृत और प्रमाणित आयुर्वेद आहार की उपलब्धता उपभोक्ताओं के लिए भी लाभकारी साबित होगी। एफएसएसएआई की वेबसाइट के मुताबिक़, पंजीकरण छोटे खाद्य विनिर्माताओं के लिए है जिसमें छोटे खुदरा विक्रेता, रेहड़ी-पटरी वाले, फेरी वाले अथवा अस्थायी स्टालधारी अथवा लघु अथवा कुटीर उद्योग शामिल हैं,जिनकी वार्षिक कुल बिक्री 12 लाख रुपए हो। सभी खाद्य कारोबारियों, जिनकी आय इस सीमा से अधिक होगी, उन्हें लाइसेंसप्राप्त करना अपेक्षित है।
