क्या हार को नहीं पचा पा रहे है तोगड़िया?

 विहिप एक ऐसा नाम है जिसकों सुनने के बाद हिंदूवादी छवी मन में उभरती है और यही हिंदूवादी छवी एक ऐसे व्यक्ति के मन में थी जिसने अपना सबकुछ इस संगठन के नाम न्योछावर कर दिया।

 

वो व्यक्ति कोई और नहीं एक सुना हुआ नाम है और वो है प्रवीण भाई तोगड़िया, 52 वर्ष में पहली बार विहिप के सांगठनिक चुनावों में तोगड़िया गुट को हार का सामना करना पड़ा है और उनकी जगह ले ली है विष्णु सदाशिव कोकजे ने, सदाशिव कोकजे कौन है और क्या है यह बाद में जानेंगे लेकिन तोगड़िया ने हार के बाद अनिश्चितकालीन अनशन का निर्णय क्यों लिया और ऐसा क्यों कर रहे है यह एक बड़ा विषय है।

 

तोगड़िया की माने तो हार के बाद नये नेतृत्व के साथ उनका कोई मतभेद अथवा मनभेद नहीं है। वह चाहते हैं कि मौजूदा विहिप नेतृत्व भी उनकी तरह अयोध्या में राम मंदिर निर्माण की मांग समेत हिन्दुत्व से जुड़े अन्य मुद्दों पर या तो उनके साथ यहां अनशन में जुड़े या अलग से नयी दिल्ली में विहिप कार्यालय में अनशन करे।

तोगड़िया ने हालांकि साफ तौर पर यह भी कहा कि जिन मुद्दों को लेकर अनशन कर रहा हूं, वे दरअसल संघ के ही मुद्दे हैं। यह उनके कोई निजी मुद्दे नहीं है। वह उम्मीद करते हैं कि संघ इसमें उनका साथ देगा। तोगड़िया ने कहा कि हमने जनता से वादा किया था कि केंद्र में सरकार बनने पर अयोध्या में राम मंदिर के लिए संसद में कानून बनेगा। हमने समान नागरिक संहिता और धारा 370 हटाने जैसे वादे किये थे। मैं इन्हीं मुद्दों को लेकर संघ के पूर्व के निर्देश के अनुरूप अपनी मांग पर अडिग हूं।

पूर्व विहिप नेता के प्रधानमंत्री नरेन्द्र मोदी, जिनके साथ कथित तौर पर उनका गुजरात के मुख्यमंत्रित्वकाल से ही मतभेद रहा है, उन पर हमला बोलते हुए कहा कि ऐसे समय में जब देश में महिलाएं सुरक्षित और उनके साथ दुष्कर्म हो रहे हैं तथा किसान और जवान भी सुरक्षित नहीं हैं, वह एक और विदेश यात्रा पर निकल पड़े हैं।

विहिप में हुए सांगठनिक चुनाव के बाद तोगड़िया ने अपने खेमे की करारी हार के बाद आरोप लगाया था कि राम मंदिर और ऐसे अन्य हिन्दुत्व से जुड़े मुद्दे उठाने के कारण उन्हें जानबूझ कर विहिप से बाहर निकाला गया है।

 

राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की गुजरात इकाई के तीन शीर्ष नेताओं ने तोगड़िया को अनिश्चितकालीन अनशन के कार्यक्रम को रद्द करने के लिए मनाने के प्रयास किया है संघ को पता है की अगर तोगड़िया अनशन करते है तो वो संघ के मुद्दों को लेकर ही अनशन करेंगे और यह उनके लिए भी नुकसानदायक है।

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