बांग्लादेश की पूर्व प्रधानमंत्री खालिदा ज़िया का निधन हो गया है। खालिदा ज़िया बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री थीं। ख़ालिदा ज़िया बांग्लादेश में बहुदलीय लोकतंत्र की समर्थक रही हैं। खालिदा ज़िया बांग्लादेश के पूर्व राष्ट्रपति ज़िया-उर-रहमान की पत्नी थीं। वह लंबे समय से कई बीमारियों से जूझ रही थीं।

खालिदा ज़िया 80 साल की थीं और कई बीमारियों से जूझ रही थीं। बांग्लादेश नेशनल पार्टी के मुताबिक, लोकल टाइम के हिसाब से सुबह 6 बजे राजधानी ढाका के एक हॉस्पिटल में उनका निधन हो गया।
भारत के प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने इसी माह ख़ालिदा ज़िया की सेहत के लिए दुआ करते हुए हर तरह की मदद की पेशकश की थी। सोमवार रात को उनकी हालत बेहद नाज़ुक हो गई थी और डॉक्टरों के मुताबिक, उन्हें लाइफ सपोर्ट दिया जा रहा था, लेकिन उनकी उम्र और खराब सेहत की वजह से एक साथ कई बीमारियों का इलाज करना मुमकिन नहीं था।
ख़ालिदा ज़िया अपने पति ज़िया उर रहमान की हत्या के बाद ही राजनीति में आई थीं। ख़ालिदा ज़िया चार दशक से ज़्यादा समय से बांग्लादेश की राजनीति में थीं। अपने पति की मौत के बाद ख़ालिदा ज़िया ने बीएनपी की कमान अपने हाथों में ली थी। साल 1981 में ज़ियाउर रहमान बांग्लादेश के राष्ट्रपति थे जब उनकी हत्या कर दी गई थी। बेगम ज़िया 1991 में बांग्लादेश की पहली महिला प्रधानमंत्री बनी थीं
बांग्लादेश नेशनल पार्टी की लीडर खालिदा ज़िया ने प्रधानमंत्री का पद संभाला था।
वह 2001 में फिर से प्रधानमंत्री चुनी गईं, लेकिन अक्टूबर 2006 में हुए आम चुनावों के लिए उन्होंने सत्ता छोड़ दी। अपने पॉलिटिकल करियर के दौरान उन पर करप्शन के आरोप लगे। वर्तमान में बीएनपी बांग्लादेश की सबसे बड़ी पार्टी है और क़यास लगाया जा रहा है कि अगले साल होने वाले चुनाव में वो सत्ता में आ सकती है।
उन्हें 2018 में पांच साल जेल में भी रहना पड़ा था। बताते चलें कि अवामी लीग की नेता शेख हसीना वाजिद के साथ भी उनका लंबा राजनीतिक विरोध रहा। शेख हसीना वाजिद को आखिरकार पिछले साल सरकार छोड़नी पड़ी थी।
जिस समय शेख़ हसीना प्रधानमंत्री थीं तो उन दिनों ख़ालिदा ज़िया जेल में थीं। ख़ालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान को भी कई मामलों में अदालत ने दोषी ठहराया था, लेकिन मोहम्मद युनूस की अंतरिम सरकार ने ख़ालिदा और उनके बेटे को बरी कर दिया
बताते चलें कि 25 दिसंबर को ख़ालिदा ज़िया के बेटे तारिक़ रहमान 17 साल देश निकाला बिताने के बाद लंदन से ढाका लौटे थे। उनके लौटने के महज पाँच दिनों बाद ख़ालिदा ज़िया ने आख़िरी सांस ली।अपनी वापसी पर तारिक़ रहमान ने एक विशाल जनसभा को संबोधितकिया था। इस सम्बोधन में उन्होंने हुए वादा किया कि वह ‘लोकतांत्रिक और आर्थिक अधिकारों’ की बहाली के लिए काम करेंगे।












