ग़ाज़ा युद्ध में अपंग होने वालों के लिए ‘फ़ुटबॉल’ बना उम्मीद भरा सहारा

ग़ाज़ा पट्टी बीते दो वर्षों से भीषण युद्ध में बुरी तरह तबाह हो चुका है। यहाँ युद्धविराम के बाद भी हालात बेहद खराब हैं। तबाही और नाउम्मीदी वाले इन नाज़ुक हालात में एक नई शुरुआत देखने को मिली है।

ग़ाज़ा युद्ध में अपंग होने वालों के लिए 'फ़ुटबॉल' बना उम्मीद भरा सहारा

ग़ाज़ा में युद्ध के दौरान, अपना एक पाँव खो चुकी फ़राह यूसेफ़ के सपने और हौसले अब भी बुलन्द हैं। फ़राह उन अनेक खिलाड़ियों में से एक हैं, जिन्होंने ग़ाज़ा में युद्ध में अपंग होने के बाद ‘होप फ़ुटबॉल चैम्पियनशिप’ में हिस्सा लिया। फ़राह के जीवन में फ़ुटबॉल एक नई उम्मीद लेकर आया है। फ़राह के लिए फ़ुटबॉल महज़ एक खेल नहीं, बल्कि एक नई शुरुआत का मौक़ा है।

फ़राह फु़टबॉल खेल के ज़रिए अपनी पहचान को वापिस पाने की कोशिश कर रही हैं। इस खेल की बदौलत वह युद्ध के पहले के समय की अपनी सुनहरी यादों से गुजरने के साथ आगे के लिए कुछ बेहतर करने की राह पर चल पड़ी हैं। फराह का यह हौसला दिखाता है कि अपंगता का अर्थ असमर्थता नहीं है, और खेल के प्रति जुनून, बदलाव और सशक्तिकरण का मार्ग भी बन सकता है।

यूएन न्यूज़ से बात करते हुए फ़राह ने कहा, “मैं यहाँ खेल में हिस्सा लेने आई हूँ, और युद्ध के पहले की अपनी क्षमताओं को वापिस पाना चाहती हूँ, और अपनी यादों को फिर से जीवित करना चाहती हूँ।” आगे उन्होंने कहा कि “मुझ जैसे सभी लोगों के लिए मेरा सन्देश है- हार मत मानो। आगे बढ़ते रहो। अपनी चोटों के बावजूद, ख़ुद को रुकने मत दो।”

इस प्रतियोगिता का आयोजन फ़लस्तीन का अपंग फ़ुटबॉल संघ कर रहा है। संघ का उद्देश्य इस पहल के तहत हालिया युद्ध में घायल हुए हज़ारों लोगों को एक साथ लाना है। यह प्रतियोगिता उन महिलाओं और पुरुषों को एक साथ लाई है, जिन्होंने युद्ध में अपने अंग खो दिए। आज अपने इरादे और दृढ़ निश्चय की बदौलत, वे इस खेल के माध्यम से एक बार फिर अपने जीवन को एक नई दिशा दे रहे हैं।

फ़लस्तीन की राष्ट्रीय अपंग फ़ुटबॉल टीम के सदस्य अब्दुल्लाह अबू मुख़ाइमेर का कहना है, “मैं अपना ये सन्देश देना चाहता हूँ कि हम ग़ाज़ा पट्टी में, अपना योगदान करने और फ़ुटबॉल, दोनों के लिए प्रतिबद्ध हैं।” बताते हैं कि इस टीम में अब नए नाम जुड़ गए हैं, क्योंकि हालिया ग़ाज़ा युद्ध ने, क़रीब 60 हज़ार लोगों को अपंग बना दिया है।

आगे उन्होंने कहा, “हम अपने प्रयास जारी रखेंगे, और हमें उम्मीद है कि सम्बन्धित प्रशासन, ग़ाज़ा में अपंग खिलाड़ियों के फ़ुटबॉल खेल की ओर ध्यान देगा, क्योंकि यहाँ अपंग लोगों की संख्या बहुत अधिक है।”

फ़लस्तीन की राष्ट्रीय अपंग फ़ुटबॉल टीम के कप्तान और मुख्य कोच अली अबू अरमानाह ने, वर्ष 2026 के अपंग फु़टबॉल विश्व कप में खेलने के ख़ातिर जगह बनाने के, हाथ से निकले अवसर पर खेद प्रकट किया। उन्होंने कहा कि “हमने यह चैम्पियनशिप, ग़ाज़ा पट्टी में हमारे बच्चों और परिवारों के विरुद्ध दो साल के युद्ध के बाद, उम्मीद को फिर से जगाने के लिए शुरू की है।”

अली अबू अरमानाह ने कहा, “इस समय, हमें 2026 के विश्व कप में खेलने की जगह बनाने के लिए, फ़लस्तीन का प्रतिनिधित्व करते हुए, इंडोनेशिया के जकार्ता में होना चाहिए था, लेकिन, सीमा चौकियाँ बन्द होने और युद्ध के कारण, हम इसमें हिस्सा नहीं ले पाए।” यह विश्व कप 2026 में कोस्टा रीका में होगा।

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