एक हालिया अध्ययन से पता चला है कि पौधे और कीड़े ध्वनि के माध्यम से आपस में बातचीत करते हैं? ईलाइफ पत्रिका में प्रकाशित शोध से पता चलता है कि पौधे और कीट ध्वनि के माध्यम से परस्पर क्रिया कर सकते हैं।

विशेष रूप से, तेल अवीव विश्वविद्यालय के शोधकर्ताओं द्वारा किए गए एक अध्ययन में पाया गया कि मादा पतंगे पौधों द्वारा उत्सर्जित अल्ट्रासोनिक ध्वनियों को पहचान सकती हैं, खासकर जब पौधे तनावग्रस्त हों, जैसे कि निर्जलित (dehydrated) होना। ये ध्वनियाँ पराध्वनिक होती हैं, जो मानव कान की श्रवण सीमा से परे (hearing range of the human) होती हैं, लेकिन पतंगे इन्हें सुन सकते हैं।
पतंगे इस जानकारी का उपयोग यह निर्णय लेने के लिए करते हैं कि उन्हें अपने अंडे कहाँ देने हैं। यह खोज बताती है कि पौधे और कीट ध्वनिक संचार में संलग्न होते हैं।
अध्ययन के अनुसार, मादा पतंगे सूखे टमाटर के पौधों से निकलने वाले अल्ट्रासोनिक संकट संकेतों का पता लगा लेती हैं और इस जानकारी के आधार पर तय करती हैं कि उन्हें अपने अंडे कहाँ देने हैं। मादा पतंगे आमतौर पर टमाटर के पौधों पर अंडे देती हैं ताकि वे अपने लार्वा के अंडे सेने के बाद उन्हें भोजन प्रदान कर सकें।
शोधकर्ताओं और प्रोफेसरों के अनुसार, हमने पौधों और कीड़ों के बीच ध्वनिक अंतःक्रिया (acoustic interaction) पहला प्रमाण प्रस्तुत किया है। उनके अनुसार, उपरोक्त परिणाम उनके पिछले शोध पर आधारित हैं, जिसमें पता चला था कि पौधे तनावग्रस्त होने पर अल्ट्रासोनिक ध्वनियाँ उत्सर्जित करते हैं।
शोधकर्ताओं का कहना है कि इस खोज के कृषि और कीट नियंत्रण पर प्रभाव पड़ सकता है, जिससे फसल के स्वास्थ्य और कीटों के व्यवहार को नियंत्रित करने के लिए ध्वनि के उपयोग की संभावना बढ़ जाती है। शोधकर्ताओं का यह भी कहना है कि यह तो बस शुरुआत है, और कई अन्य जानवर भी विभिन्न पौधों के साथ संवाद कर सकते हैं।








