आधुनिक फोरेंसिक तरीकों का इस्तेमाल करके की गई एक हालिया स्टडी में प्राचीन मिस्र में संभावित मानव बलि के सबूत मिले हैं। रिसर्च में कई खोपड़ियों में फ्रैक्चर भी पाए गए हैं, जिससे पता चलता है कि शायद सिर पर वार करके उनकी हत्या की गई होगी।
पुराने समय के मिस्र में राजाओं की मौत के बाद दरबारियों की बलि दिए जाने के ठोस सबूत सामने आए हैं। हाल ही में हुई साइंटिफिक रिसर्च के नतीजों के मुताबिक, 5,000 साल पुरानी इंसानी खोपड़ियों की मॉडर्न फोरेंसिक पड़ताल से यह साबित हुआ है कि फिरौन की मौत के बाद मिस्र में उनके दरबारियों को भी मारकर उनके साथ दफ़ना दिया जाता था ताकि वे अगले जन्म में अपने राजा की सेवा कर सकें।
यह रिसर्च साइंटिफिक जर्नल फ्रंटियर्स इन एनवायर्नमेंटल आर्कियोलॉजी में पब्लिश हुई थी। यह रिसर्च मिस्र के एबिडोस के पुराने शाही कब्रिस्तान में मिले अवशेषों पर की गई थी। पर्ड्यू यूनिवर्सिटी (Purdue University) की बायोआर्कियोलॉजिस्ट डॉक्टर रोसेलिन कैंपबेल के नेतृत्व में हुए इस नए अध्ययन में 5,000 साल पुरानी खोपड़ियों की दोबारा जांच की गई है।
रिसर्चर्स ने इस स्टडी के दौरान मॉडर्न फोरेंसिक तरीकों का इस्तेमाल करके 46 खोपड़ियों की जांच की, जिनमें से 18 पर मौत के करीब लगी चोटों के निशान मिले। मिस्र में एबिडोस के पुराने शाही कब्रिस्तान में मिले ये अवशेष मिस्र के शुरुआती राजवंश काल, लगभग 3100 से 2900 BC के हैं। ब्रिटिश आर्कियोलॉजिस्ट फ्लिंडर्स पेट्री ने 1920 के दशक में एबिडोस के शाही मकबरों के आस-पास सैकड़ों छोटे मकबरे खोजे थे।
इन मकबरों में शाही अधिकारियों, नौकरों, कारीगरों और दूसरे दरबारियों के अवशेष थे।कब्रों की इतनी ज़्यादा संख्या और शाही मकबरों के पास होने की वजह से एक्सपर्ट्स ने सवाल उठाया कि क्या इन लोगों को जानबूझकर मारकर राजा की मौत के बाद उनके साथ दफ़नाया गया था। पुराने समाजों में, यह माना जाता था कि मरने के बाद भी शासक को सेवा और आराम की ज़रूरत होगी, और इसी सोच के तहत, कुछ दरबारियों को मारकर राजा के साथ दफ़ना दिया जाता था।
शाही कब्रिस्तान के आसपास स्थित इन कब्रों के बारे में माना जाता है कि ये शाही परिवारों से जुड़े लोगों की हैं, जिनमें निरीक्षक, कारीगर, मुहर धारक और दरबारी अधिकारी शामिल हैं।
इस खोज से मिस्र के पुराने दफ़नाने के रीति-रिवाजों और मौत के बाद की ज़िंदगी के बारे में मान्यताओं को समझने में मदद मिलती है। दूसरी ओर, एक्सपर्ट्स का कहना है कि इन अवशेषों से मिले सबूतों को समझने में सावधानी बरतने की ज़रूरत है।