ऑटो कंपनियां, गाड़ी मालिक और एक्सपर्ट इस बात पर चिंता जता रहे हैं कि सरकार पेट्रोल में 20% एथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दे रही है। पर्यावरण को ध्यान में रखते हुए सरकार द्वारा पेट्रोल में इथेनॉल की मात्रा बढ़ाने की खबर है एथेनॉल मिले फ्यूल को लेकर ग्राहकों और गाड़ी कंपनियों ने चिंता जताई है। इसमें माइलेज घटने से लेकर इंजन डैमेज तक की शिकायतें सामने आ रही हैं।

मनी कंट्रोल की एक खबर के मुताबिक़,सरकार पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। पहले E10 (10% एथेनॉल) को लागू किया गया और अब सरकार E20 (20% एथेनॉल) की ओर बढ़ रही है।
खबर से पता चलता है कि पेट्रोलियम और प्राकृतिक गैस मंत्री हरदीप सिंह पुरी ने 24 जुलाई को कहा था कि एथेनॉल मिश्रण न सिर्फ पर्यावरण के लिए बेहतर है बल्कि देश की ऊर्जा सुरक्षा को भी मजबूत करता है। हालांकि इस नीति को लेकर वाहन निर्माता और उपभोक्ता दोनों के बीच गंभीर आशंकाएं बनी हुई हैं।
सरकार पर्यावरण के अनुकूल ईंधन को बढ़ावा देने के लिए पेट्रोल में एथेनॉल मिलाने की दिशा में तेजी से कदम उठा रही है। देशभर में कई गाड़ी मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद गाड़ी की परफॉर्मेंस में गिरावट की शिकायत की है। इसमें माइलेज कम होना, इंजन नॉकिंग, गाड़ी का झटके से चलना, धीमा पिकअप और एसी चलने पर जवाबदेही घट जाना जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
इस मामले में जानकारों का भी साफ तौर पर यह कहना है कि जब तक गाड़ी तकनीकी रूप से तैयार न हों, तब तक E20 का इस्तेमाल बड़ा जोखिम साबित हो सकता है। E20 को सही ढंग से अपनाने के लिए फ्यूल सिस्टम में एंटी-करोसिव कोटिंग, गैसकेट्स व सील्स की गुणवत्ता में सुधार और इंजन रीमैपिंग जैसी तकनीकी अपग्रेड की जरूरत होती है।
इस संबंध में अधिकतर व्हीकल मैन्युफैक्चरर्स साफ कह चुके हैं कि उनके पुराने मॉडल्स को E10 फ्यूल के लिए कैलिब्रेट किया गया था। ऐसे में अगर इनमें E20 का इस्तेमाल होता है, तो इंजन और अन्य फ्यूल सिस्टम को नुकसान पहुंच सकता है। सबसे ज्यादा ध्यान रखने वाली बात है कि यह नुकसान कंपनी की वारंटी में कवर नहीं होता।
खबर से मिली जानकारी से पता चलता है कि कुछ नए मॉडल्स को E20 के अनुकूल बनाया गया है। इनमें इथेनॉल-प्रतिरोधी कंपोनेंट्स, हार्डन सील्स और उन्नत इंजन कंट्रोल यूनिट (ECU) लगाए गए हैं। लेकिन, देश में चल रही ज्यादातर गाड़ियां अभी भी E10 आधारित हैं और वे E20 को झेल पाने में सक्षम नहीं हैं।
ऐसे में देशभर में कई गाड़ी मालिकों ने E20 पेट्रोल के इस्तेमाल के बाद गाड़ी की परफॉर्मेंस में गिरावट की शिकायत की है। इसमें माइलेज कम होना, इंजन नॉकिंग, गाड़ी का झटके से चलना, धीमा पिकअप और एसी चलने पर जवाबदेही घट जाना जैसे मुद्दे प्रमुख हैं।
फ्यूल लेबलिंग को एक बड़ी समस्या बताते हुए खबर से पता चलता है कि उपभोक्ता को इस बात की भी जानकारी नहीं दी जा रही है कि पेट्रोल पंप पर उसे E10 मिल रहा है या E20। ऐसे में कई बार लोग अनजाने में ही E20 भरवा लेते हैं, जो उनकी गाड़ी के लिए हानिकारक हो सकता है।
ऐसे में अगर सरकार जल्दबाजी में इस फ्यूल को देशभर में अनिवार्य बना देती है, तो पुरानी गाड़ियों के इंजन जल्दी खराब हो सकते हैं। इससे न सिर्फ आर्थिक नुकसान होगा, बल्कि सड़क सुरक्षा भी प्रभावित हो सकती है।
रिपोर्ट्स के अनुसार, खबर में कहा गया है कि E20 का सबसे बड़ा तकनीकी नुकसान इसकी ऊर्जा घनता (energy density) कम होना है। एथेनॉल पेट्रोल के मुकाबले 33% कम ऊर्जा देता है। इसके नतीजे में E20 इस्तेमाल करने से गाड़ियों की माइलेज में औसतन 4% तक की गिरावट देखी गई है, और यह असर पुरानी गाड़ियों में अधिक स्पष्ट होता है।
इसके अलावा एथेनॉल में hygroscopic गुण होने से यह वातावरण से पानी खींच लेता है। इससे फ्यूल टैंक और पाइपलाइन जैसे मेटल कंपोनेंट्स में जंग लगने का खतरा रहता है। साथ ही प्लास्टिक और रबर के पार्ट्स भी जल्दी खराब होने का खतरा होता है, जिससे फ्यूल लीक, गंदे इंजेक्टर और गैसकेट डैमेज जैसी समस्याएं हो सकती हैं।













