इकोनॉमिक सर्वे 2026 से पता चलता है कि डिजिटल लत के कारण शिक्षा के साथ कामकाज पर भी बुरा असर पड़ रहा है। सर्वे बताता है कि इस लत के कारण ध्यान भटकाने और नींद की कमी के अलावा फोकस कम होने के कारण युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर असर पड़ा है।

पिछले सप्ताह संसद में प्रस्तुत इकोनॉमिक सर्वे 2025–26 की रिपोर्ट से पता चलता है कि तेज़ी से ऑनलाइन होती दुनिया में रहने वाले भारत के युवाओं के लिए डिजिटल लत एक बड़ी और बढ़ती समस्या बन रही है। यह देश को सिर्फ डिजिटल सुविधा देने पर ही नहीं, बल्कि व्यवहार से जुड़ी सेहत की समस्याओं जैसे डिजिटल लत, कंटेंट की क्वालिटी, लोगों की भलाई पर पड़ने वाले असर और डिजिटल साफ-सफाई पर भी ध्यान देने की वकालत करती है।
सर्वे के मुताबिक़, पढ़ाई, नौकरी और नागरिक भागीदारी को बढ़ावा देने वाली डिजिटल सुविधा का अधिक प्रयोग आर्थिक और सामाजिक नुकसान का भी कारण बनती है। यह पढ़ाई के समय के नुकसान के साथ काम की क्षमता में कमी, स्वास्थ्य पर खर्च बढ़ना और जोखिम भरे ऑनलाइन व्यवहार से होने वाला आर्थिक नुकसान का कारण भी बनती है।
इस रिपोर्ट में सर्वे बताता है कि मोटापा और सही पोषण की कमी की समस्या युवाओं के शारीरिक स्वास्थ्य को नुकसान पहुंचाती है, वहीं डिजिटल लत उनके मानसिक और सामाजिक विकास को कमजोर करती है। एक-दूसरे से जुड़ी यह समस्याएं अगली पीढ़ी के स्वास्थ्य और मानव संसाधन को बचाने के लिए पॉलिसी की ज़रूरत को दिखाती हैं।
सर्वे के मुताबिक, वित्त वर्ष 2022-23 में डिजिटल अर्थव्यवस्था का राष्ट्रीय आय में योगदान 11.74 प्रतिशत था, जो वित्त वर्ष 2024-25 में बढ़कर 13.42 प्रतिशत होने का अनुमान है।
सर्वे बताता है कि भारत में इंटरनेट कनेक्शन की संख्या 2014 में 25.15 करोड़ से बढ़कर 2024 में 96.96 करोड़ हो गई है। इसमें 5G की शुरुआत और भारतनेट फाइबर के जरिए 2.18 लाख ग्राम पंचायतों तक इंटरनेट पहुंचने का बड़ा योगदान है।
इकोनॉमिक सर्वे इंटरनेट के बढ़ते इस्तेमाल की ओर ध्यान दिलाता है। यहाँ साल 2024 में 48 प्रतिशत इंटरनेट यूजर्स ऑनलाइन वीडियो देखते थे, 43 प्रतिशत सोशल मीडिया चलाते थे, 40 प्रतिशत ईमेल या म्यूजिक का इस्तेमाल करते थे और 26 प्रतिशत डिजिटल पेमेंट करते थे। संख्या के हिसाब से यह ओटीटी वीडियो और फूड डिलीवरी के करीब 40 करोड़ यूजर्स और सोशल मीडिया के करीब 35 करोड़ यूजर्स बनते हैं।
सर्वे बताता है कि यह डिजिटल निर्भरता 15 से 24 साल के युवाओं के मानसिक स्वास्थ्य पर गंभीर असर डाल रही है। सर्वे के मुताबिक़, यह समस्या चिंता, डिप्रेशन, कम आत्मविश्वास और साइबर बुलिंग के तनाव के रूप में सामने आती है।














