नई दिल्ली : चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में एक एडिडेविट फाइल कर कहा है कि जिन नेताओं को दोषी ठहराया जा चुका है, उन पर आजीवन चुनाव लड़ने पर प्रतिबंध लगाया जाए। Ec
नियमों के मुताबिक फिलहाल दोषी नेता 6 साल तक चुनाव नहीं लड़ सकता।
अगर चुनाव आयोग की इस बात को मान लिया जाता है तो कई नेताओं का भविष्य खतरे में पड़ सकता है।
देश में कई नेताओं पर कई तरह के आरोप लगें हैं जिसके बाद उन पर छह साल का बैन भी लगा हुआ है।
अगर चुनाव आयोग की बात को मान लिया जाता है तो बिहार के पूर्व मुख्यमंत्री लालू प्रसाद यादव भी कभी चुनाव नहीं लड़ पाएंगे। लालू के अलावा देश में ओर भी कई नेता हैं जिन पर कई तरह के आरोप लगे हुए हैं।
चुनाव आयोग के मुताबिक देश में 1900 से ज्यादा राजनीतिक दल नामांकित हैं लेकिन इनमें से 400 से अधिक दल आज तक चुनाव नहीं लड़े हैं। चुनाव आयोग प्रमुख जैदी ने आशंका जताई थी कि ये दल कालेधन को सफेद करने के लिए बनाए गए हैं।
हालांकि चुनाव आयोग ने ऐसे दलों को छांट कर उन पर कार्रवाई की प्रक्रिया शुरू कर दी है। जैदी ने कहा, “इन दलों का नाम रद्द किए जाने के बाद उन्हें राजनीतिक दल के तौर पर मिलने वाले दान या आर्थिक मदद पर आयकर से मिलने वाली छूट बंद हो जाएगी। ”
पत्रकारों से बात करते हुए जब जैदी से ये पूछा गया कि अभी तक इन राजनीतिक दलों का नामांकन रद्द क्यों नहीं किया गया है? इस पर जैदी ने कहा कि ये एक लंबी प्रक्रिया है।
जैदी ने कहा, “आखिरकार हम ये करेंगे लेकिन चुनाव आयोग की फौरी कार्रवाई के बाद ये अनियमितता को पकड़ लिया है।” चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव आयोगों से ऐसी सभी पंजीकृत चुनावी पार्टियों का ब्योरा मांगा है जिन्होंने कभी चुनाव नहीं लड़ा है। चुनाव आयोग ने राज्य चुनाव आयोग से कभी चुनाव न लड़ने वाली पार्टियों को मिले चंदे का भी ब्योरा मांगा है।
जैदी के अनुसार चुनाव आयोग अब हर साल सभी पंजीकृत राजनीतिक दलों की जांच की जाएगी और किसी तरह की अनियमितता पाए जाने पर उन पर कार्रवाई की जाएगी।