अध्ययन में बताया गया है कि विश्व भर में गर्माती जलवायु की वजह से वैश्विक वर्षा रुझानों में भी व्यापक बदलाव नज़र आ रहे हैं।
डब्ल्यूएमओ यानी विश्व मौसम विज्ञान संगठन की एक नई रिपोर्ट में आगाह किया गया है कि दुनिया, ख़तरनाक गर्मी के एक दौर की ओर बढ़ रही है। रिपोर्ट के मुताबिक़, यह लगभग निश्चित है कि अगले पाँच वर्षों के दौरान वैश्विक तापमान रिकॉर्ड स्तर पर या फिर उसके नज़दीक बने रहेंगे।
यूएन एजेंसी की इस रिपोर्ट को ब्रिटेन के मौसम विज्ञान विभाग द्वारा तैयार किया गया है, जिसमें पिछले पाँच वर्षों के दौरान जलवायु का आकलन, और अगले पाँच वर्षों में तापमान व आकाश से गिरने वाले जल के विभिन्न रूपों (बारिश, बर्फ़बारी) के रुझानों का अनुमान व्यक्त किया गया है।
अध्ययन के अनुसार, 2026 से 2030 के दौरान, इस बात की सम्भावना लगभग 86 प्रतिशत है कि कम से कम एक वर्ष, रिकॉर्ड पर सर्वाधिक गर्म साल होने के मामले में 2024 को पीछे छोड़ दे।
साथ ही, अगले पाँच वर्ष की अवधि में कम से कम एक वर्ष के दौरान औसत वैश्विक तापमान, पूर्व-औद्योगिक काल के स्तर की तुलना में 1.5 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि की सीमा को कुछ समय के लिए पार कर सकता है।
पेरिस जलवायु परिवर्तन समझौते के अन्तर्गत, 1.5 डिग्री सेल्सियस तापमान वृद्धि की यह सीमा अहम है, और लम्बे समय तक इस सीमा से अधिक बढ़ोत्तरी की स्थिति में चरम मौसम घटनाओं, खाद्य असुरक्षा, विस्थापन और पारिस्थितिकी तंत्रों के ढहने का जोखिम बढ़ेगा।
जलवायु लक्ष्य अब भी सम्भव
हालांकि, अस्थाई तौर पर तापमान वृद्धि होने का अर्थ यह नहीं है कि पेरिस जलवायु समझौते में तय किए गए लक्ष्य, पहुँच से दूर हो गए हैं, चूँकि ऐसा तभी होगा जब ऐसी स्थिति कई दशकों तक बरक़रार रहे, न कि कुछ वर्षों के लिए।
इसके बावजूद, यह विश्लेषण सचेत करता है कि वैश्विक तापमान में वृद्धि की गति तेज़ हो रही है और अत्यधिक गर्मी वाली घटनाओं की आवृत्ति बढ़ रही है।
2026 से 2030 के दौरान, वार्षिक वैश्विक तापमान, 1850-1900 की तुलना में 1.3 डिग्री सेल्सियस से 1.9 डिग्री सेल्सियस अधिक रहने की सम्भावना है। रिपोर्ट के अनुसार, ऐसी सम्भावना 75 प्रतिशत है कि इन पूरे पाँच वर्षों के दौरान औसत तापमान वृद्धि 1.5 डिग्री सेल्सियस को पार कर जाए।
रिपोर्ट के मुख्य लेखक लियोन हरमैन्सन ने बताया कि 2026 के अन्त में अल नीन्यो की सम्भावना व्यक्त की गई है, जिससे अगला वर्ष यानि 2027, रिकॉर्ड ध्वस्त कर देने वाला साल साबित हो सकता है।
आर्कटिक क्षेत्र में बढ़ता तापमान
अनुमानों के अनुसार, आर्कटिक क्षेत्र, पृथ्वी के अन्य हिस्सों की तुलना में कहीं अधिक गति से गर्म होना जारी रखेगा, और यह ख़तरे की घंटी है।
वैज्ञानिकों का मानना है कि आर्कटिक क्षेत्र में समुद्र में जमे हुए पानी की मात्रा में गिरावट जारी रहेगी, विशेष रूप से बैरेन्ट्स सागर (Barents Sea), बेरिंग सागर (Bering Sea) और ओखोत्स्क सागर (Sea of Okhotsk) में।
समुद्र में जमे हुए जल की हानि मायने रखती है चूँकि इससे सूर्य की रोशनी को परिवर्तित करने की आर्कटिक क्षेत्र की क्षमता में कमी आती है, और पारिस्थितिकी तंत्रों, मौसमी रुझानों और ध्रुवीय क्षेत्रों में आजीविकाओं में व्यवधान भी।
अध्ययन में बताया गया है कि विश्व भर में गर्माती जलवायु की वजह से वैश्विक वर्षा रुझानों में भी व्यापक बदलाव नज़र आ रहे हैं। अफ़्रीका में सहेल क्षेत्र, उत्तरी योरोप, अलास्का और साइबेरिया में 2026 से 2030 के दौरान, औसत से कहीं अधिक वर्षा हो सकती है, जबकि ऐमेज़ोन क्षेत्रों और उप उष्णकटिबन्धीय क्षेत्रों के कुछ हिस्सों में शुष्क परिस्थितियाँ होने का अनुमान है।
आगामी सर्दियों में, उत्तरी ध्रुव के नज़दीक स्थित पृथ्वी के दूरस्थ क्षेत्रों में सामान्य से अधिक नमी, बारिश या बर्फ़बारी होने का अनुमान है।
मौसम विज्ञान एजेंसियों के इन अनुमानों के ज़रिए सरकारों, क्षेत्रीय जलवायु केन्द्रों और राष्ट्रीय मौसम विज्ञान एजेंसियों के लिए जोखिमों के अनुरूप तैयारी करने में मदद मिलने की आशा है।