वैज्ञानिकों की इस खोज से संभव हुआ समुद्र के पानी को पीना

दुनिया इस समय सबसे ज़्यादा पीने के पानी की किल्लत का सामना कर रही है। मीठे पानी की समस्या एक ऐसी वैश्विक चुनौती है जिसका वैज्ञानिक काफी समय से समाधान तलाश रहे हैं। भविष्य में इसको लेकर कई बड़े युद्ध होने की संभावना भी व्यक्त की जा रही है।

वैज्ञानिकों की इस खोज से संभव हुआ समुद्र के पानी को पीना

लगातार बढ़ रही जनसंख्या के कारण दुनिया के कई देश पीने लायक पानी की किल्लत का सामना कर रहे हैं। हालाँकि हमारी धरती का लगभग 70 फीसदी हिस्सा सागरों से ढका है, लेकिन इसके बावजूद बड़ी संख्या में धरतीवासी पीने के पानी से महरूम हैं।

दरअसल समुद्री पानी पूरी तरह से खारा होता है। ऐसे में लगातार बढ़ रही वैश्विक जनसंख्या के लिए उपलब्धता कम होती जा रही है। इसी वजह से मीठे पानी की कमी विश्व की सबसे बड़ी चुनौती है। वैज्ञानिकों ने एक बहुत बड़ी खोज को अंजाम देते हुए इसका समाधान निकाला है।

अमरीका के केप कॉड के पास वैज्ञानिकों द्वारा की गई इस खोज को मिशन एक्सपेडिशन 501 का नाम दिया गया है। इसके तहत वैज्ञानिकों ने समुद्र में पानी के इस विशाल भंडार की खोज की है। इस प्रोजेक्ट में करीब 25 मिलियन डॉलर की लागत आई है, जो कि भारतीय रुपयों में लगभग 2100 करोड़ है। इस मिशन में अमरीका सहित यूरोप और कई दूसरे देशों के वैज्ञानिक भी शामिल थे।

इस मिशन के तहत लिफ्टबोट रॉबर्ट जहाज की सहायता से करीब 400 मीटर तक ड्रिल करने के बाद वैज्ञानिकों ने हजारों नमूने लिए। इन नमूनों में वैज्ञानिकों को ताजा पानी मिला। वैज्ञानिकों का मानना है कि इस जगह पर जितना ताजा पानी मौजूद है वह न्यूयॉर्क शहर की 800 वर्षों की जरूरतों को पूरा कर सकता है।

विशेषज्ञों का यह भी कहना है कि साल 2030 तक पानी की जितनी आपूर्ति होगी उसके मुकाबले मांग 40 प्रतिशत ज्यादा बढ़ जाएगी। वहीं ग्लोबल वार्मिंग के चलते समुद्र का जल स्तर बढ़ने से तटीय पानी भी खारा हो सकता है। इससे भविष्य में एक बड़ा जल संकट सामने आ सकता है।

वैज्ञानिकों का यह भी कहना है कि अमरीका के अलावा कनाडा, इंडोनेशिया, दक्षिण अफ्रीका जैसे तटीय क्षेत्रों में यह स्त्रोत मिल सकता है। इस कारण कहा जा रहा है कि यह पानी सूखे और तूफान से प्रभावित क्षेत्रों के लिए बैकअप हो सकता है।

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