रोमांटिक रिश्तों को आपराधिक मामलों जैसा न मानें- सुप्रीम कोर्ट

शीर्ष अदालत ने राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग की याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका पर सुनवाई के दौरान सुप्रीम कोर्ट ने रेप जैसे अपराध और रोमांटिक मामलों में फर्क की बात कही।

रोमांटिक रिश्तों को आपराधिक मामलों जैसा न मानें- सुप्रीम कोर्ट

सुप्रीम कोर्ट ने टिप्पणी करते हुए कहा- ‘आजकल को-एजुकेशन है, बच्चे बड़े होते हैं, भावनाएं विकसित होती है। क्या प्यार करना अपराध है? हमें रेप जैसे अपराध और इन रोमांटिक मामलों में फर्क करना होगा…।’

वयस्क होने की दहलीज पर खड़े किशोरों के प्रेम संबंधों को अलग नजरिए से देखे जाने की बात करते हुए जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि प्रेम संबंधों को अपराध न मानें। कोर्ट ने यह भी कहा कि माता-पिता द्वारा पोक्सो एक्ट के तहत मामला दर्ज कराने पर लड़की मानसिक पीड़ा झेलती है।

गौरतलब है कि मंगलवार को राष्ट्रीय बाल अधिकार संरक्षण आयोग (NCPCR) की विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर अदालत में सुनवाई हो रही थीं। पंजाब और हरियाणा हाई कोर्ट के 2022 के फैसले को चुनौती देते हुए हाई कोर्ट ने कहा था कि 16 वर्षीय मुस्लिम लड़की, मुस्लिम पुरुष से वैध विवाह कर सकती है और उसने इस जोड़े को सुरक्षा भी दी थी। जस्टिस नागरत्ना ने कहा कि रोमांटिक रिश्तों को आपराधिक मामलों जैसा न मानें।

जस्टिस नागरत्ना ने यह भी कहा कि जो लोग वयस्क होने की दहलीज पर है, उनके बीच के प्रेम संबंधों यानी रोमांटिक रिलेशन को अलग नजरिए से देखा जाना चाहिए। उन्होंने आगे कहा कि ऐसे भी मामले होते है जहां वयस्क होने की कगार पर खड़े किशोर-किशोरियां घर छोड़कर चले जाते हैं, वे शादी करना चाहते हैं।

बताते चलें कि इससे पहले सुप्रीम कोर्ट ने 16 साल की मुस्लिम लड़की की शादी को वैध मानते हुए NCPCR की याचिका खारिज कर दी थी। कोर्ट ने कहा कि मुस्लिम पर्सनल लॉ के तहत यह बाल विवाह नहीं है और इसमें कोई कानूनी मसला नहीं बनता। कोर्ट ने NCPCR की 3 अन्य याचिकाएं भी खारिज कर दीं।

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