भारत डेंगू से बचाव के लिए अपनी पहली देसी वैक्सीन लाने के करीब है। शोधकर्ता इस वैक्सीन की तयारी के परीक्षण के अंतिम चरण में हैं। जिससे इस घातक मच्छर जनित बीमारी के खिलाफ दुनिया के पहले एकल-खुराक वाले टीकों में से एक की उम्मीदें बढ़ गई हैं।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ‘डेंगीऑल’ (DengiAll) नाम की यह वैक्सीन अभी फेज़ 3 क्लिनिकल ट्रायल के आखिरी फेज़ में है, जिसे फार्मास्युटिकल कंपनी पैनेशिया बायोटेक ने इंडियन काउंसिल ऑफ़ मेडिकल रिसर्च (ICMR) के साथ मिलकर बनाया है। इस वैक्सीन की खास बात यह है कि इसमें सिर्फ़ एक डोज़ (सिंगल डोज़) है, जबकि दुनिया में मौजूद ज़्यादातर वैक्सीन कई डोज़ पर आधारित हैं।
रिपोर्ट में कहा गया है कि यह वैक्सीन डेंगू वायरस के सभी चार टाइप (सीरोटाइप) से सुरक्षा देने के लिए बनाई गई है। पैनासिया बायोटेक ने अपने टीके, डेंगीऑल, के अंतिम चरण III परीक्षण शुरू कर दिए हैं, जो कंपनी द्वारा लगभग 15 वर्षों से किए जा रहे अनुसंधान प्रयासों का हिस्सा है। बताया जा रहा है कि यह सिंगल-डोज़ वैक्सीन 1 से 60 वर्ष की आयु के लोगों के लिए प्रभावी हो सकती है।
विश्व स्वास्थ्य संगठन का कहना है कि अकेले भारत में ही 2021 से अब तक दस लाख से अधिक मामले और कम से कम 1,500 मौतें दर्ज की गई हैं। वहीँ आंकड़े बताते हैं कि दुनिया की लगभग आधी आबादी अब खतरे में है, और हर साल 100-400 मिलियन संक्रमण के मामले सामने आ रहे हैं।
वैश्विक महामारी को रोकने की उम्मीद में, पैनासिया बायोटेक ने अपने टीके, डेंगीऑल के अंतिम चरण के तीसरे परीक्षण शुरू कर दिए हैं, जिस पर वह लगभग 15 वर्षों से काम कर रही है।
भारतीय चिकित्सा अनुसंधान परिषद की देखरेख में चल रहे इस अध्ययन में देश भर के दस हज़ार से अधिक स्वयंसेवक शामिल हैं, और यदि परीक्षण के परिणाम अनुकूल रहे तो अगले साल की शुरुआत में ही वैक्सीन को बाजार में उतारा जा सकता है।
नई दिल्ली स्थित इंस्टीट्यूट ऑफ लिवर एंड बिलियरी साइंसेज में क्लिनिकल वायरोलॉजी की प्रोफेसर डॉक्टर एकता गुप्ता ने जानकारी दी है कि डेंगू को अब भारत में अतिस्थानिक माना जाता है, जिसमें वायरस के चारों सीरोटाइप एक साथ फैल रहे हैं। पैनासिया के मुख्य वैज्ञानिक अधिकारी सैयद खालिद अली ने मीडिया को बताया है कि इस वैक्सीन को जल्द से जल्द उपलब्ध कराने की कोशिश करेंगे।














