नई दिल्ली में इंडिया-एआई इंपैक्ट समिट 2026 का आयोजन होने जा रहा है। इस सम्मेलन में दुनिया के सौ से ज्यादा देश हिस्सा लेंगे। यह किसी भी विकासशील देश में होने वाला पहला वैश्विक एआई शिखर सम्मेलन है। इसमें यह तय करने का प्रयास होगा कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आम लोगों की जिंदगी को कैसे बेहतर बना सकता है।

भारत आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की इस समिट में गूगल के सुंदर पिचाई, माइक्रोसॉफ्ट के बिल गेट्स और सैम ऑल्टमैन जैसे दिग्गज एक ही मंच पर नजर आने वाले हैं। एआई को मानव कल्याण, पर्यावरण संरक्षण और आर्थिक विकास के उपयोग से जोड़ने वाले इस शिखर सम्मेलन के मुख्य उद्देश्य जन, पृथ्वी और प्रगति हैं। वैश्विक नेता इस सम्मेलन में , नीति निर्माता, वैज्ञानिक और उद्योग जगत के विशेषज्ञ एआई के उपयोग और भविष्य पर चर्चा करेंगे।
सात कार्य समूहों पर आधारित सम्मलेन के इस ढांचे के हर चक्र में एआई से जोड़ा गया है। मानव पूंजी पर केंद्रित पहले चक्र में एआई के दौर के लिए लोगों को नई स्किल सिखाने और रोजगार के नए अवसर तैयार करने पर ध्यान दिया जाएगा। दूसरा चक्र सामाजिक सशक्तिकरण से जुड़ा है, जिसका उद्देश्य एआई के जरिए समाज के हर वर्ग तक सुविधाएं पहुंचाना है।
तीसरा चक्र सुरक्षित और भरोसेमंद एआई पर काम करेगा, जिसमें पारदर्शिता और जवाबदेही सुनिश्चित करने पर जोर होगा। चौथा चक्र विज्ञान से जुड़ा है, जिसमें एआई के जरिए वैज्ञानिक खोज और अनुसंधान को बढ़ावा दिया जाएगा।
इसका पांचवां चक्र सहनशीलता, नवाचार और कार्यकुशलता पर आधारित है, जिसमें पर्यावरण के अनुकूल और संसाधन बचाने वाली एआई तकनीक विकसित करने पर जोर रहेगा।
छठा चक्र एआई संसाधनों के जनतंत्रीकरण पर केंद्रित है। इसका उद्देश्य एआई तकनीक और डेटा तक सभी देशों और संस्थानों की समान पहुंच सुनिश्चित करना है। सातवां चक्र आर्थिक और सामाजिक विकास के लिए एआई के उपयोग पर काम करेगा।
स्टैनफोर्ड एआई इंडेक्स रिपोर्ट 2025 के मुताबिक़, भारत में एआई भर्ती में लगभग 33 प्रतिशत वार्षिक वृद्धि दर्ज की गई है। सरकार एआई स्किल बढ़ाने के लिए पीएचडी, पोस्टग्रेजुएट और ग्रेजुएट छात्रों को समर्थन दे रही है।
भाषिणी प्लेटफॉर्म 36 से ज्यादा लिखित भाषाओं और कई बोलियों में काम करता है। कि सामाजिक क्षेत्र में भी एआई का बड़ा योगदान है।
एआई को सुरक्षित बनाने के लिए भी देश में काम हो रहा है। साथ ही तकनीकी विकास में भी भारत तेजी से आगे बढ़ रहा है। भारत गिटहब पर जनरेटिव एआई प्रोजेक्ट में दुनिया का दूसरा सबसे बड़ा योगदानकर्ता बन चुका है। कई बड़ी वैश्विक टेक कंपनियां भारत में एआई और डेटा इंफ्रास्ट्रक्चर में निवेश कर रही हैं।
एआई का उपयोग विज्ञान और रिसर्च में भी बढ़ रहा है। एआई की मदद से मौसम पूर्वानुमान, कृषि सलाह और ऊर्जा प्रबंधन में किया जा रहा है। भारत पेटेंट फाइल करने वाले देशों में छठे स्थान पर है।
एआई का प्रभाव आर्थिक क्षेत्र में भी देखा जा सकता है। कृषि, स्वास्थ्य, शिक्षा और न्याय व्यवस्था में इसका उपयोग बढ़ा है। भारत के एआई तकनीक क्षेत्र से 2025 तक लगभग 280 बिलियन डॉलर राजस्व मिलने का अनुमान है। भारत में करीब 1.8 लाख स्टार्टअप हैं और 2024 में शुरू हुए लगभग 89 प्रतिशत स्टार्टअप एआई का उपयोग कर रहे हैं।













