करप्शन इंडेक्स 2025: भ्रष्टाचार मुक्त होने के लिए भारत को एक लंबा सफर तय करना होगा

182 देशों के सर्वे के बाद ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने वर्ष 2025 के लिए ग्लोबर करप्शन इंडेक्स जारी कर दिया है। इसमें डेनमार्क शीर्ष पर है वहीँ भारत की स्थिति में मामूली सुधार के साथ इसे चुनौतीपूर्ण बताया गया है। साथ ही रिपोर्ट में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार विरोधी प्रगति को धीमा बताया गया है।

करप्शन इंडेक्स 2025: भ्रष्टाचार मुक्त होने के लिए भारत को एक लंबा सफर तय करना होगा

करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स की वर्ष 2025 में भारत को 91वें नंबर पर रखा गया है। रिपोर्ट में पत्रकारों की सुरक्षा के मामले में भारत की स्थिति को अब भी चुनौतीपूर्ण बताया गया है। इस रैंकिंग में चीन 73वें स्थान पर है। रैंकिंग में मामूली सुधार के बावजूद भारत का स्कोर बताता है भी ‘भ्रष्टाचार मुक्त’ होने के लिए एक लंबा सफर तय करना बाकी है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से से जारी करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स 2025 में भारत की रैंकिंग में मामूली सुधार हुआ है। भ्रष्टाचार पर नजर रखने वाली अंतरराष्ट्रीय संस्था ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल की ओर से जारी ‘करप्शन परसेप्शंस इंडेक्स (सीपीआई) 2025’ में भारत की रैंकिंग वाली रिपोर्ट में पत्रकारों की सुरक्षा और भ्रष्टाचार के खिलाफ रिपोर्टिंग को लेकर अब भी गंभीर चिंता दिखाई गई है।

मंगलवार को जारी रिपोर्ट में कहा गया है कि भारत ने पिछले साल के मुकाबले अपनी स्थिति बेहतर की है। 2024 में भारत 96वें स्थान पर था, जो अब सुधरकर 91वें स्थान पर आ गया है।

बताते चलें कि इस सूची के तहत जारी इंडेक्स में देशों को शून्य यानी बेहद भ्रष्ट से लेकर 100 जिसका मतलब है बेहद साफ-सुथरी स्थिति के पैमाने पर आंका जाता है। भारत के स्कोर में पिछले साल के मुकाबले एक अंक की बढ़ोतरी हुई है और अब यह 39 पर पहुंच गया है।

इस मामूली सुधार के साथ जहाँ भारत का 39 का स्कोर अभी भी वैश्विक औसत 42 से कम है वहीँ रिपोर्ट बताती है कि 50 से कम स्कोर वाले देशों में भ्रष्टाचार एक गंभीर समस्या बनी हुई है। रिपोर्ट में भारत को भ्रष्टाचार की रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक बताया गया है।

ट्रांसपेरेंसी इंटरनेशनल ने भारत को उन देशों की श्रेणी में जगह दी है जो भ्रष्टाचार पर रिपोर्टिंग करने वाले पत्रकारों के लिए खतरनाक हैं। बिजनेस और निवेश के लिहाज से रैंकिंग में सुधार अच्छा संकेत है।

डेनमार्क ने इस सूची में अपनी श्रेष्ठता बरकरार रखी है। यह देश 89 अंकों के साथ दुनिया का सबसे कम भ्रष्ट देश बना हुआ है। सूची में इसके बाद फिनलैंड और सिंगापुर का नंबर आता है।

अन्य देशों की बात करें तो ब्रिटेन 20वें जबकि अमरीका 29वें स्थान पर है। सूची में सबसे निचले पायदान पर दक्षिण सूडान और सोमालिया हैं, जिनका स्कोर महज 9 है।

रिपोर्ट से पता चलता है कि 2012 के बाद से दुनिया भर में मारे गए 829 पत्रकारों में से 90% हत्याएं उन देशों में हुई हैं जिनका सीपीआई स्कोर 50 से कम है। इस श्रेणी में भारत (39) के अलावा ब्राजील (35), मैक्सिको (27) और पाकिस्तान (28) भी शामिल हैं। रिपोर्ट में एशिया-पैसिफिक क्षेत्र में भ्रष्टाचार विरोधी प्रगति को धीमा बताया गया है।

आगे संस्था का यह भी कहना है कि जब पत्रकारों को निशाना बनाया जाता है, तो जवाबदेही तय करना मुश्किल हो जाता है और भ्रष्टाचार बढ़ता है। साथ ही यह चेतावनी दी गई है कि दुनिया भर में लोग जवाबदेही की कमी से नाराज हैं और विरोध प्रदर्शन कर रहे हैं।

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