कोरोना संकट के सबसे बुरे दौरे में अभी नहीं पहुंचा है जर्मनी

यूरोप में कोरोना संक्रमण के सबसे ज्यादा मामले इटली और स्पेन के बाद जर्मनी और फ्रांस में हैं. जर्मनी में मृत्यु दर बाकियों से कम है. लेकिन सरकार का कहना है कि सबसे बुरा दौर आना अभी बाकी है.

कोरोना संकट में जर्मनी अभी अपने सबसे बुरे दौर में नहीं पहुंचा है. चांसलर कार्यालय के हेल्गे ब्राउन ने स्थानीय अखबार फ्रांकफुर्टर अल्गेमाइने साइटुंग से बातचीत में यह कहा. हेल्गे ने कहा, “सरकार का काम है कि इस संकट के सबसे बुरे दौर में नागरिकों को बचाने की तैयारी करे.” उनके अनुसार “संक्रमण दर का सबसे बुरा दौर” अभी तक नहीं आया है लेकिन निकट भविष्य में देश को इसका सामना करना होगा.

जर्मनी में लगभग लॉकडाउन जैसी स्थिति है और 19 अप्रैल तक लोगों को घरों में ही रहने को कहा गया है. ब्राउन ने कहा कि नियमों में बदलाव उसी स्थिति में मुमकिन है जब संक्रमित लोगों की संख्या कम होने लगे. जर्मनी में हर दिन चार से छह हजार नए मामले सामने आ रहे हैं. हालांकि देश के लिए यह राहत की बात है कि आंकड़ा इससे ज्यादा नहीं बढ़ रहा है लेकिन ब्राउन के अनुसार जब तक इस संख्या में लगातार गिरावट नहीं देखी जाती, तब तक सोशल डिस्टैन्सिंग के नियमों में बदलाव नहीं किया जा सकता.

वहीं दक्षिणी प्रांत बवेरिया के मुख्य मंत्री मार्कुस जोएडेर ने एक अन्य अखबार बिल्ड अम जॉनटाग से बातचीत में कहा कि लॉकडाउन के नियमों में जितनी जल्दी बदलाव किया जाएगा संक्रमण के दोबारा बढ़ने का खतरा भी उतना ही ज्यादा हो जाएगा. उन्होंने कहा, “हमें अभी धैर्य रखना होगा.” देश में कोरोना के सबसे ज्यादा मामले बवेरिया में ही दर्ज हुए हैं.

जर्मनी में “लॉकडाउन” ना कह कर इसे “संपर्क प्रतिबंध” का नाम दिया गया है. सार्वजनिक जगहों पर दो से ज्यादा लोगों को जमा होने की अनुमति नहीं है. लोग खाने पीने का सामान लेने, दवा खरीदने और सैर करने के लिए घर से बाहर निकल सकते हैं. एक ही परिवार के लोग हों तो दो से ज्यादा भी हो सकते हैं. हेल्गे ब्राउन के अनुसार इन नियमों के लागू होने से पहले देश में संक्रमित लोगों की संख्या हर तीन दिन में दोगुनी हो रही थी. यह गति अभी कम हुई है लेकिन संतोषजनक नहीं है. उन्होंने कहा कि डॉक्टरों और अस्पतालों पर दबाव ना पड़े यह सुनिश्चित करने के लिए जरूरी है कि संख्या तीन-चार नहीं, बल्कि दस दिन में जा कर दोगुनी हो, “शायद ग्यारह या बारह दिन बेहतर होंगे ताकि हम अस्पतालों में आईसीयू तैयार कर सकें.”

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