कॉप30 यानी संयुक्त राष्ट्र का वार्षिक जलवायु सम्मेलन ब्राज़ील के बेलेम शहर में सोमवार को आरम्भ हुआ है। इसमें स्वच्छ ऊर्जा को बढ़ावा देने, बाढ़, सूखा, तूफ़ान समेत चरम मौसम घटनाओं से निपटने के लिए सहनसक्षमता निर्माण और देशों के बीच सहयोग को मज़बूत करने जैसे समाधानों की पुकार लगाई गई है।

जलवायु परिवर्तन के संकट से निपटने के लिए आधे-अधूरे उपायों का युग अब बीत चुका है। इसके कारण समुदाय तहस-नहस हो रहे हैं, क़ीमतों में उछाल आ रहा है और इसी सन्देश के साथ कॉप30 की शुरुआत की गई।
ऐमेज़ोन क्षेत्र में स्थित बेलेम, कॉप30 सम्मेलन का मेज़बान शहर है, जोकि अगले दो सप्ताह तक जलवायु वार्ता का केन्द्र बना रहेगा। यहाँ दुनिया भर से विश्व नेता व प्रतिनिधि एकत्र हुए हैं। इसे 21वीं सदी की प्रगति की कहानी बताते हुए हमारे युग के रूपान्तरकारी आर्थिक बदलावों की बात कही गई।
यूएन जलवायु संस्था का एक आरम्भिक आकलन दर्शाता है कि इन सकंल्पों से वर्ष 2035 तक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन में 12 फ़ीसदी तक की कटौती लाई जा सकती है। हालांकि जलवायु विशेषज्ञों ने इस प्रगति को 1.5°C के नज़रिए से अपर्याप्त बताया है। अब चुनौती इन वादों को जल्द से जल्द ज़मीनी स्तर पर लागू करने की है।
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लुइज़ इनासियो लूला दा सिल्वा ने जलवायु परिवर्तन को नकारने की प्रवृत्ति को पराजित करने और वैश्विक तापमान में वृद्धि को 1.5 डिग्री सेल्सियस तक सीमित रखने के लक्ष्य के लिए ठोस क़दम उठाने पर बल दिया। आगे उन्होंने कहा कि यह क्षण, इस अवसर के अनुरूप तत्काल क़दम उठाने का है।
राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा के अनुसार, कॉप30 सम्मेलन को ऐमेज़ोन क्षेत्र के केन्द्र में लाना एक कठिन, मगर आवश्यक कार्य था। इस निर्णय से दुनिया को सबसे विविधतापूर्ण क्षेत्र की वास्तविकता को देखने का एक अवसर मिला है, जोकि पाँच करोड़ से अधिक लोगों और 400 आदिवासी समूहों का घर है।
जलवायु परिवर्तन मामलों के लिए यूएन संस्था (UNFCCC) के प्रमुख साइमन स्टील ने अपने सम्बोधन में जलवायु महत्वाकाँक्षा को ठोस कार्रवाई में बदलने का आग्रह किया। उन्होंने बेलेम में जुटे प्रतिनिधियों को कहा कि “आपका काम यहाँ एक दूसरे से लड़ना नहीं है। आपका काम, एक साथ मिलकर, इस जलवाय संकट से लड़ना है।”
जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता छोड़नी होगी
ब्राज़ील के राष्ट्रपति लूला दा सिल्वा ने विश्व नेताओं से महत्वाकाँक्षी जलवायु संकल्पों को पारित करने का आहवान करते हुए कहा कि अनुकूलन प्रयासों को राष्ट्रीय रणनीतियों के केन्द्र में रखना होगा।
उन्होंने मानवता के लिए एक ऐसे रोडमैप की अपील की, जिससे जीवाश्म ईंधन पर निर्भरता कम हो, वनों की कटाई पर रोक लगे और जलवायु कार्रवाई के लिए आवश्यक धनराशि उपलब्ध हो सके।
इसके मद्देनज़र, उन्होंने विकासशील देशों में ऊर्जा स्रोतों में बदलाव की प्रक्रिया को समर्थन देने के इरादे से एक नए कोष की घोषणा की, जिसके लिए तेल की खोज से प्राप्त होने वाले राजस्व का इस्तेमाल किया जाएगा।
बढ़ते वैश्विक तापमान पर लगाम कसने के लिए कॉप30 सम्मेलन के पहले दिन अनेक देशों ने अपनी नई राष्ट्रीय जलवायु योजनाओं को प्रस्तुत किया। अब ऐसे देशों की संख्या 113 तक पहुँच गई है, जोकि कुल वैश्विक ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन का क़रीब 70 फ़ीसदी प्रदर्शित करते हैं।
उत्सर्जन कटौती में प्रगति
UNFCCC कार्यकारी सचिव साइमन स्टील ने कहा कि अतीत में कॉप सम्मेलनों के दौरान जिन संकल्पों व समझौतों पर सहमति बनी है, उनके नतीजे अब नज़र आने लगे हैं, और वैश्विक उत्सर्जनों में कटौती भी हो रही है।
उन्होंने माना कि अब भी और क़दम उठाए जाने की आवश्यकता है, और ऐमेज़ोन नदी व वन क्षेत्र के पास स्थित बेलेम शहर में आयोजित यह सम्मेलन, इस दिशा में प्रेरित कर सकता है।
साइमन स्टील ने चेतावनी देते हुए कहा कि कोई भी राष्ट्रीय योजना इस समस्या से अपने आप नहीं निपट सकती है। और न ही कोई देश उन आर्थिक झटकों को सहन कर सकता है, जिनसे सकल घरेलू उत्पाद (जीडीपी) में तेज़ गिरावट आए।
UNFCCC कार्यकारी सचिव ने कॉप30 सम्मेलन के लिए निम्न प्राथमिकताओं को पेश किया है:
जीवाश्म ईंधन पर व्यवस्थित, न्यायसंगत ढंग से अपनी निर्भरता घटाना
नवीकरणीय ऊर्जा क्षमता में तीन गुना वृद्धि, ऊर्जा दक्षता को दोगुना बढ़ाना
विकासशील देशों में जलवायु कार्रवाई के लिए 1,300 अरब डॉलर की वार्षिक धनराशि सुनिश्चित करना
चरम मौसम घटनाओं से बचाव, जलवायु अनुकूलन संकेतकों पर एक वैश्विक फ़्रेमवर्क को स्वीकृति देना
न्यायसंगत बदलाव और टैक्नॉलॉजी को लागू करने के कार्यक्रम पर कार्यक्रम को आगे बढ़ाना
इससे पहले, 6-7 नवम्बर को, बेलेम में विश्व नेताओं की शिखर बैठक में उष्णकटिबन्धीय वर्षावनों के संरक्षण के लिए 5.5 अरब डॉलर की धनराशि की लामबन्दी की घोषणा की गई थी।
अन्य सामूहिक संकल्पों में आदिवासी समुदायों के भूमि अधिकारों को मान्यता देना, सतत ढंग से ईंधन उत्पादन में चार गुना वृद्धि करना, जलवायु कार्रवाई को निर्धनता, भूख और पर्यावरणीय नस्लवाद के विरुद्ध लड़ाई से जोड़ना है।













