भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद ने पकड़ा तूल

प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी पर सोनिया गांधी और राहुल गांधी के खिलाफ अपमानजनक भाषा के प्रयोग का आरोप लगाया गया है। इस प्रस्ताव के साथ ही संसद के बजट सत्र के दूसरे चरण में एक बार फिर सत्ता पक्ष और कांग्रेस मुक़ाबले पर है।

भाजपा और कांग्रेस के बीच विवाद ने पकड़ा तूल

कांग्रेस ने राज्यसभा के सभापति को पत्र लिखा है और इसमें प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के राष्ट्रपति के अभिभाषण पर धन्यवाद प्रस्ताव के दौरान दिए गए भाषण का हवाला दिया है। कांग्रेस नेताओं पर दिए गए उनके बयान को ही आधार बनाकर प्रधानमंत्री मोदी के भाषण के दौरान कांग्रेस की तरफ से विशेषाधिकार हनन का प्रस्ताव पेश किया गया है।

कांग्रेस द्वारा भेजे गए इस नोटिस में आरोप लगाया है कि पीएम मोदी का बयान सोनिया गांधी और राहुल गांधी के लिए अपमानजनक है। कांग्रेस के ये दोनों ही वर्तमान में लोकसभा के सांसद हैं।

कांग्रेस की ओर से राज्यसभा के सभापति को लिखे पत्र में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के बयान को भी शामिल किया है। पत्र के मुताबिक प्रधनमंत्री ने कहा था- “मुझे बहुत आश्चर्य होता है कि चलो भाई, नेहरू जी का नाम हमसे कभी छूट जाता होगा और यदि छूट जाता है, तो हम उसे ठीक भी कर लेंगे… (व्यवधान)… क्योंकि वे देश के पहले प्रधानमंत्री थे, लेकिन मुझे यह समझ नहीं आता कि उनकी पीढ़ी का कोई भी व्यक्ति नेहरु जी का सरनेम रखने से क्यों डरता है? क्या शर्मिंदगी है? नेहरु सरनेम रखने में क्या शर्मिंदगी है?… (व्यवधान)… इतना बड़ा महान व्यक्ति आपको मंजूर नहीं है, परिवार मंजूर नहीं है…”

जबकि भाजपा लंदन में दिए गए राहुल गांधी के बयान पर माफ़ी की मांग पर अड़ी है। भाजपा अध्यक्ष जेपी नड्डा ने आज कांग्रेस और राहुल गांधी पर जमकर हमला बोला। अपनी बात में उन्होंने कहा- “राहुल गांधी जब आप भारत के आंतरिक मामलों में किसी दूसरे देश के दखल की मांग करते हैं, तो आपका इरादा क्या है? किसी दूसरे देश द्वारा भारत के आंतरिक मामलों में हस्तक्षेप की मांग करना भारत की संप्रभुता पर हमला है। मैं राहुल गांधी से पूछना चाहता हूं कि यूरोप और अमेरिका से भारत के घरेलू मामलों में दखल देने के पीछे उनकी क्या मंशा है?”

इस सवाल के जवाब में कांग्रेस अध्यक्ष मल्लिकार्जुन खरगे ने जेपी नड्डा पर निशाना साधा। माइक्रोब्लॉगिंग साइट ट्विटर पर अपनी प्रतिक्रिया में उन्होंने ट्वीट करके कहा कि बीजेपी भयावह बेरोजगारी, कमरतोड़ महंगाई और “परम मित्र” के घोटाले को छिपाने के लिए, इससे ध्यान भटकाने के लिये वो ये सब बातें कर रहें हैं।

मौजूदा हालत को देखते हुए सत्ता पार्टी और विपक्ष के बीच चल रहा ये वाद विवाद थमता नज़र नहीं आ रहा है।

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