कांग्रेस ने 12 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (एसआईआर) के दौरान फॉर्म-7 के दुरुपयोग पर चिंता व्यक्त करते हुए गुरुवार को निर्वाचन आयोग को पत्र लिखा है और आग्रह किया है कि इससे संबंधित सभी संदिग्ध मामलों की प्रक्रिया रोकी जाए और स्वतंत्र जांच कराई जाए।

मुख्य निर्वाचन आयुक्त ज्ञानेश कुमार को कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल ने पत्र लिखकर फॉर्म-7 संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाने की मांग की है। गौरतलब है कि फॉर्म-7 आधिकारिक आवेदन पत्र है। इसके माध्यम से मतदाता सूची में किसी व्यक्ति के नाम के शामिल होने पर आपत्ति जताने या पहले से सूचीबद्ध नाम को हटाने का अनुरोध किया जाता है।
कांग्रेस के संगठन महासचिव केसी वेणुगोपाल पत्र में दावा किया कि फॉर्म-7 का दुरुपयोग कर पात्र मतदाताओं के नाम हटाए जा रहे हैं। उन्होंने यह मांग की है कि फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाने चाहिए।
पत्र में केसी वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘हम इस आयोग का ध्यान एक अत्यंत गंभीर और चिंताजनक विषय की ओर आकृष्ट करना चाहते हैं, जो विशेष गहन पुनरीक्षण के अंतर्गत दावा और आपत्तियां दर्ज कराने के चरण में योग्य मतदाताओं के नामों को गलत तरीके से हटाए जाने से संबंधित है।’’
वेणुगोपाल ने दावा किया है कि फॉर्म-7 के ‘प्री-प्रिंटेड’ आवेदन बड़ी संख्या में किसी केंद्रीकृत प्रणाली से तैयार किए जा रहे हैं। इनका उपयोग अनुसूचित जाति, अनुसूचित जनजाति, अल्पसंख्यकों एवं 60 वर्ष से अधिक आयु के वरिष्ठ नागरिकों को निशाना बनाने के लिए किया जा रहा है। उनके मुताबिक़, इन फॉर्म को संगठित ढंग से विभिन्न निर्वाचन क्षेत्रों में बीएलओ को सौंपा जा रहा है।
उन्होंने इस पर आयोग के तत्काल हस्तक्षेप को आवश्यक बताते हुए ऐसे कार्यकर्ताओं का हवाला दिया है जो ‘फॉर्म-7’ का दुरुपयोग कर योग्य मतदाताओं के नाम अंतिम मतदाता सूची से हटवा रहे हैं।
कांग्रेस नेता का कहना है कि यदि इन कार्रवाइयों को रोकने के साथ आयोग द्वारा संज्ञान नहीं लिया गया, तो इससे भारतीय जनता पार्टी को अनुचित चुनावी लाभ प्राप्त करने का दुस्साहस मिलेगा और लाखों मतदाता विशेषकर पिछड़े, हाशिए पर रहने वाले समुदायों से संबंधित लोग अपने मताधिकार से वंचित हो जाएंगे।
वेणुगोपाल ने आगे कहा कि दावों एवं आपत्तियों की अवधि में प्रमाण प्रस्तुत करने का दायित्व फॉर्म-7 भरने वाले व्यक्ति पर ही होता है और झूठी जानकारी देने पर जनप्रतिनिधित्व अधिनियम, 1950 के अंतर्गत दंड का प्रावधान है, लेकिन ज़मीनी स्तर पर जो कुछ हो रहा है, वह अत्यंत चौंकाने वाला है और इस पर तत्काल हस्तक्षेप आवश्यक है।
कांग्रेस नेता ने पत्र से माद्यम से बिना वैध पहचान व प्रमाण वाले सभी संदिग्ध फॉर्म-7 की प्रक्रिया तुरंत रोकने की बात कही है। साथ ही उन्होंने बीएलओ और ईआरओ को यह निर्देश दिए जाने की बात भी कहै है कि व्यक्तिगत सत्यापन के बिना कोई भी नाम न हटाया जाए।
कांग्रेस नेता वेणुगोपाल ने आयोग से यह आग्रह भी किया, ‘‘12 राज्यों में फॉर्म-7 से संबंधित संपूर्ण आंकड़े सार्वजनिक किए जाएं।’’ वेणुगोपाल ने कहा, ‘‘मताधिकार लोकतंत्र की आत्मा है। किसी भी संगठित प्रयास द्वारा नागरिकों को इससे वंचित करना असंवैधानिक है।” उन्होंने इस विषय को गंभीरता से लेते हुए आयोग से तत्काल आवश्यक कदम उठाए जाने का आग्रह किया है।





