मणिपुर में कांग्रेस नंबर 1 होने के बाद भी सत्ता से बेदखल

इंफाल : मणिपुर में कांग्रेस और बीजेपी दोनों ने ही सरकार बनाने का दावा किया है, लेकिन बीजेपी ने अपने पक्ष में 32 विधायकों के समर्थन पत्र के साथ उन्हें राज्यपाल के सामने पेश कर फिलहाल रेस में आगे निकलती दिख रही है. Congress

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मणिपुर के मुख्यमंत्री इबोबी सिंह ने भी राज्यपाल को अपना इस्तीफ़ा सौंप दिया है और सरकार बनाने का दावा फिर पेश किया है.

इससे पहले राज्यपाल ने उनसे कहा था कि वह इस्तीफ़ा दें ताकि नई सरकार बनाने की प्रक्रिया को शुरू किया जा सके.

पहले इबोबी सिंह इस्तीफ़े को लेकर आनाकानी करते दिखे लेकिन आखिरकार सोमवार शाम को उन्होंने अपना इस्तीफ़ा दिया और सरकार बनाने का दावा भी कर दिया. इबोबी सिंह 15 साल से मणिपुर के सीएम हैं और कांग्रेस मणिपुर में सबसे बड़ी पार्टी बनी है लेकिन बहुमत से दूर है.

वहीं, बीजेपी ने मणिपुर में अपना मुख्यमंत्री उम्मीदवार चुन लिया है. पीयूष गोयल की मौजूदगी में एन बीरेन सिंह को विधायक दल का नेता चुना गया है.

पिछले साल अक्टूबर में ही बीरेन सिंह कांग्रेस से बीजेपी में आए हैं और कांग्रेस की सरकार में मंत्री भी रह चुके हैं. विधायक दल का नेता चुने जाने के बाद बीजेपी के नेता राज्यपाल नजमा हेपतुल्ला से फिर मिले हैं.

दरअसल पेंच की शुरुआत तब हुई जब बीजेपी के बाद रविवार देर शाम मुख्यमंत्री और कांग्रेस नेता इबोबी सिंह ने भी राज्यपाल से मिलकर सरकार बनाने का दावा पेश किया.

कांग्रेस ने एनपीपी के जिन विधायकों के समर्थन का दावा किया न सिर्फ वे बीजेपी के साथ राज्यभवन में दिखे, बल्कि कांग्रेस के श्याम कुमार और तृणमूल कांग्रेस के रोबिंद्र
सिंह ने भी अपना पाला बदल लिया है.

वहीं, कांग्रेस छोड़कर बीजेपी के साथ आए श्याम कुमार के खिलाफ दलबदल कानून के तहत कार्रवाई की बात हो रही है, लेकिन बीजेपी उनके साथ खड़ी है. इतना ही नहीं कांग्रेस को जिस एनपीपी से साथ की उम्मीद थी वो भी अब हाथ से फिसलती दिख रही है.

फिलहाल बीजेपी ने जिन 32 विधायकों के साथ का दावा पेश किया है उनमें अपने 21 विधायकों के अलावा एनपीपी और एनपीएफ़ के चार-चार, और एलजेपी, टीएमसी और कांग्रेस के 1-1 विधायक शामिल हैं.

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