जलवायु परिवर्तन से एशिया-अमरीका में 2050 तक डेंगू संक्रमण में 76 फीसद उछाल का अनुमान- अध्ययन

धरती पर बढ़ते तापमान के कारण 2050 तक एशिया और अमरीका के कई क्षेत्रों में डेंगू के मामलों में 76 फीसद तक की वृद्धि की सम्भावना है। बढ़ते तापमान के चलते इस बीमारी के प्रसार की बात वाशिंगटन और स्टैनफोर्ड विश्वविद्याल सहित अमरीकी राष्ट्रीय आर्थिक अनुसंधान ब्यूरो के वैज्ञानिकों की एक टीम द्वारा किए गहे शोध से सामने आई है।

जलवायु परिवर्तन से एशिया-अमरीका में 2050 तक डेंगू संक्रमण में 76 फीसद उछाल का अनुमान- अध्ययन

अध्ययन के मुताबिक़, ग्रीनहाउस गैस उत्सर्जन स्तर के आधार पर साल 2050 तक यह मामले 49 प्रतिशत से बढ़कर 76 प्रतिशत हो सकते हैं। ‘प्रोसीडिंग्स ऑफ द नेशनल एकेडमी ऑफ साइंसेज’ पत्रिका में प्रकाशित इन निष्कर्षों से पता चलता है कि जलवायु परिवर्तन के कारण बढ़े तापमान से 1995 से 2014 तक एशिया और अमेरिका के 21 देशों में औसतन 18 प्रतिशत डेंगू के मामले सामने आए – जो वर्तमान घटना अनुमानों के आधार पर सालाना 46 लाख से ज्यादा अतिरिक्त संक्रमणों के बराबर है।

बताते चलें कि यह अध्ययन मध्य और दक्षिण अमरीका के साथ ही दक्षिण पूर्व और दक्षिण एशिया के 21 देशों में किया गया। स्थानीय स्तर पर डेंगू की घटनाओं के 14 लाख से अधिक मामलों का विश्लेषण किया गया, जिसमें महामारी की बढ़ती दर और संक्रमण की पृष्ठभूमि, दोनों को शामिल किया गया।

डेंगू के मामलों में बढ़ोत्तरी पर वाशिंगटन विश्वविद्यालय में एन्वारमेंटल हेल्थ की असिस्टेंट प्रोफेसर और प्रमुख लेखिका मारिसा चाइल्ड्स कहती है- तापमान का प्रभाव मेरी अपेक्षा से कहीं अधिक था। तापमान में मामूली बदलाव भी डेंगू को फैलने में मदद करेगा। हम पहले से ही जलवायु परिवर्तन के प्रभाव देख रहे हैं।”

जानकार कहते हैं कि डेंगू तापमान के “गोल्डीलॉक्स जोन” में पनपता है। इसके मामले लगभग 27.8 डिग्री सेल्सियस (82 डिग्री फैरेनहाइट) पर चरम पर होते हैं, ठंडे क्षेत्रों के गर्म होने पर यह तेजी से बढ़ता है, लेकिन पहले से ही गर्म क्षेत्रों की तय सीमा से अधिक होने पर थोड़ा कम हो जाता है।

एक्सपर्ट के अनुसार, मेक्सिको, पेरू और ब्राजील जैसे देशों के ठंडे, अधिक जनसंख्या वाले क्षेत्रों में सबसे ज्यादा वृद्धि का अनुमान है। अध्ययन के अनुसार, कई अन्य एंडेमिक रीजन में तापमान वृद्धि के कारण डेंगू के मामलों में वृद्धि जारी रहेगी। अध्ययन यह भी बताता है कि जलवायु परिवर्तन को लेकर बढ़ी सजगता से डेंगू के मामलों में काफी कमी आएगी।

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