सोशल मीडिया पर परीक्षाओं और मूल्यांकन संबंधी भ्रामक जानकारी फैलाने वालों के खिलाफ केंद्रीय माध्यमिक शिक्षा बोर्ड ने सख्त रुख अपनाया है। बोर्ड ने कहा कि ऐसी गतिविधियां परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता और निष्पक्षता को खतरे में डालती हैं।

बोर्ड की ओर से 16 मार्च को एक सर्कुलर जारी करते हुए चेतावनी दी गई है कि ऐसी गतिविधियां परीक्षा व्यवस्था की विश्वसनीयता को प्रभावित करती हैं। साथ ही इसमें शामिल लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई किए जाने की भी बात कही गई है।
मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़ सीबीएसई के परीक्षा नियंत्रक डॉक्टर संयम भारद्वाज ने सर्कुलर को जारी किया है। इस सर्कुलर में कहा गया है कि कक्षा दसवीं और बारहवीं की बोर्ड परीक्षा 2026 के मूल्यांकन के दौरान सोशल मीडिया पर अफवाहें और गलत जानकारी फैल रही है। बोर्ड ने इन गतिविधियों को परीक्षा प्रक्रिया की गोपनीयता और निष्पक्षता के लिए खतरे में डालने वाली बताया है।
सर्कुलर में सीबीएसई ने कहा है कि कुछ व्यक्ति, जो मूल्यांकन प्रक्रिया में सीधे शामिल नहीं हैं या ऑन स्क्रीन मार्किंग से संबंधित हैं, सोशल मीडिया पर गलत और भ्रामक जानकारी पोस्ट कर रहे हैं। उनकी पोस्ट छात्रों, अभिभावकों और अन्य हितधारकों में अनावश्यक भ्रम पैदा कर रहे हैं तथा परीक्षा व्यवस्था की साख को नुकसान पहुंचा रहे हैं।
सर्कुलर में सीबीएसई के प्रमुख निर्देश और प्रतिबंध इस प्रकार है-
० हितधारकों को सलाह दी जाती है कि वह केवल सीबीएसई के आधिकारिक चैनलों और वेबसाइट www.cbse.gov.in से जारी अपडेट्स पर ही विश्वास करें। सोशल मीडिया पर बिना सत्यापन वाली पोस्ट्स को महत्व न दें।
० सीबीएसई परीक्षाओं या मूल्यांकन प्रक्रिया से संबंधित कोई भी झूठी या भ्रामक जानकारी सोशल मीडिया पर फैलाना पूरी तरह प्रतिबंधित है।
० सीबीएसई का नाम, लोगो या सीबीएसई भवन की तस्वीरों का उपयोग करके भ्रम पैदा करने या लोगों को गुमराह करने की अनुमति किसी भी व्यक्ति को नहीं है।
० इन गतिविधियों में सम्मिलित पाए जाने वाले लोगों के खिलाफ संबंधित कानूनी प्रावधानों के तहत कार्रवाई की जाएगी।
० आधिकारिक संचार केवल बोर्ड के अधिकृत माध्यमों से ही जारी किए जाते हैं.
परीक्षा व्यवस्था की को लेकर भी सीबीएसई ने सभी से अपील की है कि वह परीक्षा व्यवस्था की अखंडता और गोपनीयता बनाए रखने में पूरा सहयोग करें। साथ ही बोर्ड ने कहा है कि बिना किसी प्रमाण के कोई भी जानकारी सोशल मीडिया पर अपलोड न करें, क्योंकि इससे छात्रों और अभिभावकों में अनावश्यक चिंता और भ्रम फैले।











