नेलसन मंडेला अन्तरराष्ट्रीय दिवस के सम्मान में संयुक्त राष्ट्र ने शुक्रवार को विभिन्न गतिविधियों के ज़रिए उन्हें याद किया। महासचिव एंटोनियो गुटेरेस ने वर्ष 2025 का मंडेला पुरस्कार भी प्रदान किया है। इस अवसर पर होने वाले आयोजनों में महासभा की एक बैठक के अलावा एक जनसेवा गतिविधि और एक चैम्बर संगीत समारोह शामिल हैं।

बतातेचलें कि संयुक्त राष्ट्र महासभा ने वर्ष 2009 में 18 जुलाई को नेल्सन मंडेला अंतर्राष्ट्रीय दिवस घोषित किया। यह दिन नेल्सन मंडेला के जन्मदिन के उपलक्ष्य में मनाया जाता है। उनका जन्म 18 जुलाई 1918 को हुआ था। 5 दिसंबर 2013 को 95 वर्ष की आयु में उनका निधन हो गया।
यूएन प्रमुख एंतोनियो गुटेरेश ने, यूएन महासभा में अपने संबोधन में, दक्षिण अफ़्रीकी नागरिक अधिकारों के प्रतीक नेलसन मंडेला के असाधारण जीवन का जश्न मनाया। नेलसन मंडेला को, प्यार से उनके खोसा कुल के नाम – मदीबा से भी जाना जाता है।
इस अवसर पर एंतोनियो गुटेरेस ने कहा- “उन्होंने उत्पीड़न के क्रूर बोझ को सहन किया और प्रतिशोध व विभाजन के दृष्टिकोण के बजाय, सुलह, शान्ति और एकता के नज़रिए के साथ उभरे।” आगे उन्होंने कहा- “आज मदीबा की विरासत अब हमारी ज़िम्मेदारी है। हमें शान्ति, न्याय और मानवीय गरिमा के प्रति उनकी प्रतिबद्धता को आगे बढ़ाना होगा।”
संयुक्त राष्ट्र प्रमुख ने इस विरासत का सम्मान करने के लिए, दो व्यक्तियों को वार्षिक नेलसन मंडेला पुरस्कार प्रदान किया। यह पुरस्कार शान्ति और सामूहिक कार्रवाई के प्रति दिवंगत नेता की प्रतिबद्धता और निर्धनता व असमानता से निपटने की इस वर्ष के विषय को दर्शाते हैं। पुरस्कार पाने वालों के नाम हैं: कनाडा की ब्रेंडा रेनॉल्ड्स और केनया की कैनेडी ओडेडे।
कनाडा की एक सामाजिक कार्यकर्ता के रूप में ब्रेंडा रेनॉल्ड्स ने दशकों तक आदिवासी लोगों के अधिकारों, मानसिक स्वास्थ्य और सदमा से प्रभावित लोगों की देखभाल को आगे बढ़ाने में काम किया है।
अपने स्वीकृति भाषण में उन्होंने कहा- “हमने दोनों देशों में जो अनुभव किए हैं, उनमें कई समानताएँ हैं, जिनमें, सरकारों ने हमारी पहचान बदलने, उत्पीड़न का सामना करने और हमारे देशों में मानवाधिकारों के उल्लंघन का सामना करने के लिए प्रभावशाली नीतियाँ बनाईं।”
1988 में उन्होंने सस्केचेवान में पहले आवासीय विद्यालय यौन शोषण मामले में 17 किशोर लड़कियों को अपना समर्थन दिया था। उन्होंने बताया कि इन आरोपों के बाद कनाडा भर से यौन शोषण के पीड़ितों द्वारा अपने अनुभवों के बारे में बताए जाने की शुरुआत हुई। ये आरोप और जानकारियाँ, कनाडा में अब तक के सबसे बड़े सामूहिक मुक़दमा बन गए। जिसे कनाडा के आदिवासी आवासीय विद्यालय समायोजन समझौते (IRSSA) के रूप में जाना जाता है।
कैनेडी ओडेडे केनया में किबेरा नामक निर्धन बस्तियों में पले-बढ़े हैं। उन्होंने सड़क पर रहने से लेकर वैश्विक स्तर पर पहचान बनाई है। उन्हें टाइम पत्रिका के 2024 के 100 सबसे प्रभावशाली लोगों में से एक नामांकित किया गया और उनका नाम, न्यूयॉर्क टाइम्स के लोकप्रिय लेखकों में शामिल हो गया।
कैनेडी ओडेडे ने अपने स्वीकृति भाषण में बताया कि वह दस साल की उम्र में घरेलू हिंसा से बचने के लिए, नैरोबी के आवारा बच्चों की क़तार में शामिल हो गए थे। एक दिन मैं भूख से बहुत परेशान होकर उन्होंने एक आम चुरा लिया। भीड़ ने उन्हें पीट-पीटकर मार डालने के हालात बना दिए। तभी एक अजनबी ने आगे आकर उस आम की क़ीमत अदा कर दी। उस व्यक्ति के इस दयालु कार्य ने उन्हें दयालुता का वह रास्ता दिखाया जो हिंसा के चक्र को रोक सकती है।
एक कार्यकर्ता के रूप में उन्होंने अपनी यात्रा की शुरुआत की। इसके लिए उन्होंने एक फ़ैक्टरी की मामूली आमदनी की बचत करते हुए एक फ़ुटबॉल ख़रीदने और अपने समुदाय को एकजुट करने के साथ इस सफर को चुना। उन्होंने कहा- “वह गेंद सिर्फ़ खेलने के लिए नहीं थी; वह संगठित होने का एक साधन थी। एक ऐसा केन्द्र, जिसके इर्द-गिर्द एक समुदाय का निर्माण हो सकता था।”
उनका यह प्रयास जल्द ही शाइनिंग होप फ़ॉर कम्युनिटीज़ (SHOFCO) में तब्दील हो गया। यह केनया का सबसे बड़ा ज़मीनी आन्दोलन है और कैनेडी ओडेडे इसका नेतृत्व अब उसके मुख्य कार्यकारी अधिकारी (CEO) के रूप में कर रहे हैं। SHOFCO पूरे देश में सक्रिय है, स्थानीय समूहों को सशक्त बनाता है और सालाना 40 लाख से ज़्यादा लोगों को ज़रूरी सेवाएँ प्रदान करता है।
आगे उन्होंने कहा- “SHOFCO में हम सभी को, मंडेला ने दिखाया कि नेतृत्व, केवल सत्ता में पैदा हुए लोगों के लिए आरक्षित विशेषाधिकार नहीं है। यह उन सभी का अधिकार है जो सेवा करने और अपने भीतर झाँकने को तैयार हैं।”










