बोधगया ब्लास्ट केस: पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा

एनआईए की विशेष अदालत ने साल 2013 में बोधगया सीरियल बम विस्फोट मामले में इंडियन मुजाहिदीन के पांच आतंकवादियों को दोषी ठहराया था


बोधगया ब्लास्ट केस में शुक्रवार को सजा का ऐलान हुआ. पांचों दोषियों को आजीवन कारावास की सजा सुनाई गई है. एनआईए कोर्ट ने सजा सुनाई है.

इससे पहले पटना में एनआईए की विशेष अदालत ने साल 2013 में बोधगया सीरियल बम विस्फोट मामले में इंडियन मुजाहिदीन के पांच आतंकवादियों को दोषी ठहराया था. इस धमाके में एक तिब्बती बौद्ध भिक्षु और एक टूरिस्ट घायल हो गए थे.

 

जज मनोज कुमार ने बोधगया में एक बौद्ध मंदिर में 7 जुलाई, 2013 को हुए नौ धमाकों में इंडियन मुजाहिदीन के आतंकी हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी, इम्तियाज अंसारी, उमर सिद्दीकी, अज़हरुद्दीन कुरैशी और मुजीबुल्लाह अंसारी को दोषी करार दिया था.

 

पटना सिविल कोर्ट में 2013 में गठित एनआईए कोर्ट का यह पहला फैसला है. बोधगया ब्लास्ट में एनआईए ने 90 गवाहों को पेश किया गया. विशेष न्यायाधीश ने 11 मई 2018 को दोनों पक्षों की ओर से बहस पूरी होने के बाद अपना निर्णय 25 मई तक सुरक्षित रख लिया था. सीरियल ब्लास्ट का सरगना हैदर अली उर्फ ब्लैक ब्यूटी था.

 

आरोपियों में इम्तियाज अंसारी, उमर सिद्दीकी, अजहरुद्दीन कुरैशी और मुजिबुल्लाह अंसारी भी शामिल हैं. ये सभी पटना के बेउर जेल में बंद हैं. एनआईए ने मामले की जांच करने के बाद सभी आरोपियों पर तीन जून 2014 को चार्जशीट फाइल की थी. 27 अक्टूबर 2013 को पटना के गांधी मैदान में हुए ब्लास्ट मे भी ये सभी आरोपी हैं.

 

7 जुलाई 2013 को सुबह 5:30 से 6:00 के बीच महाबोधि मंदिर में एक के बाद एक धमाके हुए थे. आतंकियों ने महाबोधि वृक्ष के नीचे भी दो बम लगाए थे. वहां सिलेंडर बम रखा गया था. जिसमें टाइमर लगा हुआ था.

 

एनआईए ने जांच मे यह भी माना है कि रोहिंग्या मुसलमानों के खिलाफ कार्रवाई का बदला लेने के लिए गया मे ब्लास्ट किया गया था. ब्लास्ट के लिए हैदर ने रायपुर में रहने वाले सिमी के सदस्य उमर सिद्दीकी से संपर्क किया था. हैदर रायपुर गया था. वहां राजा तालाब स्थित एक मकान में जिहाद के नाम पर उसे दीनी बातें बताकर भड़काया गया था. हैदर को बम विस्फोट का सामान भी वहीं दिया गया.

 

हैदर ने ब्लास्ट के पहले बोधगया का पांच दौरा किया था. वहां की सुरक्षा व्यवस्था का जायजा लिया था. उसके साथ आतंकी संगठन सिमी के सदस्य भी थे. हैदर ने बौद्ध भिक्षु बनकर मंदिर में प्रवेश किया और विस्फोट किया था.

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