कन्नौज सीट पर भाजपा और सपा की प्रतिष्ठा दावं पर

ठीक एक महीना पहले भाजपा के हाथों कन्नौज की सभी विधानसभा सीट गंवाने वाली सपा के सामने अब एमएलसी चुनाव की परीक्षा है। यादव लैंड के रूप में सियासी पहचान रखने वाले अपने ही गढ़ में भाजपा से चौतरफा घिरी सपा के सामने इस सियासी दुर्ग को बचाने की तगड़ी चुनौती भी है। उधर भाजपा ने भी सपा के इस आखिरी मोर्चे पर फतह के लिए पूरा जोर लगाया है।

कन्नौज सीट पर भाजपा और सपा की प्रतिष्ठा दावं पर

किसी समय में सपा की सबसे मज़बूत जमीन माने जाने वाली कन्नौज की सीट पर इस समय भाजपा का वर्चस्व है। लोकसभा, विधानसभा और पंचायत चुनाव के ज़रिये भाजपा यहाँ अपना परचम पहरा चुकी है। फिलहाल यहाँ की ज़मीन सपा के पैरों से लगभग निकली हुई है। ऐसे में एमएलसी चुनाव के समय दोनों ही पार्टियां ज़ोर आज़माइश में लगी हुई हैं।

हालाँकि इस समय ये सीट सपा के हाथ में है। देखने वाली बात ये है कि क्या सपा इस कब्जे को बरकरार रखेगी या फिर भाजपा इस सीट को भी अपने पीला में लाने वाली है। इस सीट को हथियीने के लिए भाजपा ने भी पूरी घेराबंदी कर रखी है। इस सीट के लिए भाजपा ने उम्मीदवारी युवा इकाई के प्रदेश मुखिया प्रांशुदत्त द्विवेदी को दी है। दूसरी ओर सपा से हरीश यादव मैदान में हैं।

आज जिस सीट पर वोटिंग होनी है उसमें कन्नौज के अलावा फर्रुखाबाद, इटावा और औरेया के भी नाम शामिल हैं। इन चारों जिलों में विधानसभा की कुल 13 सीट हैं। इसमें हाल ही में हुए विधानसभा चुनाव में भाजपा ने नौ में जीत प्राप्त की है जबकि सपा को चार पर जीत मिली थी।

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