कोरोना काल में कामकाजी लोगों का सहारा बनी साइकिलें

पश्चिम बंगाल सरकार ने कभी भीड़ कम करने के लिए कोलकाता की तमाम प्रमुख सड़कों पर साइकिल चलाने पर पाबंदी लगा दी थी. लॉकडाउन में ढील के बाद परिवहन के साधनों की कमी के चलते अब वही साइकिल दफ्तर आने-जाने का सबसे बड़ा सहारा है.

लॉकडाउन तो खत्म हो गया है लेकिन यातायात सामान्य नहीं हुआ है. फिर बसों और ट्रेनों में भीड़ के चलते कोरोना वायरस का डर भी लोगों को सता रहा है. यही वजह है कि कुछ लोग तो 40-50 किमी दूर से साइकिल चला कर दफ्तर की आवाजाही कर रहे हैं. कोलकाता में साइकिल के बढ़ते इस्तेमाल और कोरोना महामारी के दौर में इसकी उपयोगिता को ध्यान में रखते हुए सरकार ने ज्यादातर इलाकों में साइकिल चलाने पर लगी पाबंदी हटा दी है.

मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने दफ्तर और कामकाज की जगहों पर आने-जाने के लिए मुसीबतों से जूझ रहे लोगों को ध्यान में रखते हुए पुलिस से महानगर के प्रमुख इलाकों में साइकिलों पर लगी पाबंदी हटाने को कहा था. इसी के अनुरूप कोलकाता पुलिस के आयुक्त अनुज शर्मा ने एक अधिसूचना जारी कर यह पाबंदी हटा ली है. यह छूट फिलहाल 30 जुलाई तक रहेगी. उसके बाद हालात को देखते हुए इसे आगे बढ़ाने पर विचार किया जाएगा.

पहली जून से पश्चिम बंगाल सरकार ने विभिन्न क्षेत्रों को खोलने की छूट दी थी. तमाम निजी और सरकारी दफ्तरों को भी आठ जून से 70 फीसदी तक कर्मचारियों के साथ खोलने का निर्देश दिया गया था. लेकिन निजी बसों, लोकल ट्रेनों और मेट्रो का संचालन अभी भी शुरू नहीं हुआ. आम लोगों को घर से दफ्तर या कामकाज की जगहों तक आने-जाने में भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा था.

 

सरकार की छूट के बावजूद पीली टैक्सियां भी सड़कों पर कम ही हैं. इसकी वजह यह है कि ज्यादातार टैक्सी ड्राइवर बिहार और पूर्वी उत्तर प्रदेश के हैं जो लॉकडाउन के दौरान कमाई ठप होने की वजह से अपने गांव लौट गए हैं. सरकारी बसें जरूर चल रही हैं. लेकिन उनकी तादाद बहुत कम है. नतीजतन ज्यादातर बसों में भारी भीड़ उमड़ने की वजह से सोशल डिस्टेंसिंग की धज्जियां उड़ती रहीं हैं. इसके साथ ही राज्य में कोरोना संक्रमण के मामले भी तेजी से बढ़ते रहे. बीते महज पांच दिनों में संक्रमण के दो हजार मामले सामने आए हैं.

राज्य सरकार आम लोगों की दिक्कतों को ध्यान में रखते हुए उनको साइकिल से दफ्तर आने-जाने की अनुमति देने पर विचार कर रही थी. मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने कोलकाता पुलिस को इस प्रस्ताव पर समुचित अध्ययन का निर्देश दिया था. उन्होंने पुलिस के शीर्ष अधिकारियों से ऐसी सड़कों की शिनाख्त करने को कहा था जहां साइकिल सवारों को सुरक्षित सवारी की अनुमति दी जा सके.

 

बीते सोमवार को केबिनेट की बैठक के बाद ममता ने कहा, “कई लोगों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है. लोगों की सुरक्षा के लिए सोशल डिस्टेंसिंग का पालन अनिवार्य है. इसलिए मैंने कोलकाता पुलिस से साइकिलों को अनुमति देने को कहा है.” मुख्यमंत्री ने कहा है कि अगर कोरोना महामारी के चलते लॉकडाउन लंबा खिंचा तो सरकार विदेशों की तर्ज पर अलग साइकिल लेन बनाने पर विचार करेगी.

DW से साभार सहित

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