मोदी बोले- देश में टकराव चाहते हैं नकली गोरक्षक

 

मेडक। प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने तेलंगाना के मेडक में जनसभा को संबोधित करते हुए एक बार फिर गोरक्षकों का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि कुछ लोग गोरक्षा के नाम पर समाज में टकराव लाने की कोशिश कर रहे हैं और ऐसे लोगों को दंडित करने की जरूरत है। पीएम मोदी मेडक में 1200 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट की आधारशिला रखने गए हैं।

Modi

नकली गोरक्षकों को मिले सजा
पीएम मोदी ने एक बार फिर दोहराया, नकली गोरक्षक, समाज में तनाव पैदा करना चाहते हैं। राज्य सरकारें उन पर कठोर कार्रवाई करें। सच्चे गोरक्षक खुल कर नकली गोरक्षकों को बेनकाब करें।’ साथ ही उन्होंने आम लोगों को भी आगे आकर ऐसे नकली गोरक्षकों को पहचानने की अपील की। उन्होंने कहा, ‘भारत विविधताओं से भरा देश है। देश की अखंडता एकता हमारी प्राथमिक जिम्मेवारी है। इसे परिपूर्ण करने के लिए सकारात्मक रूप से गोसेवा करें, लेकिन नकली लोग समाज, देश को तबाह करते हैं। ऐसे लोगों की पहचान कर उन्हें अलग करने की जरूरत है। इन्हें दंडित करने की जरूरत है।’

हम गाय को कृषि के साथ जोड़ें, वो बोझ नहीं- मोदी
पीएम ने कहा कि  गाय को कृषि के साथ जोड़ा जाए तो वो बोझ नहीं बनेगी। उन्होंने कहा, ‘महात्मा गांधी बताते थे कि हमारी मां हमें बचपन में कुछ समय तक दूध पिलाती है लेकिन गाय मां हमें जीवन भर दूध पिलाती है और हमारा पालन पोषण करती है। गाय मां मृत्यु के बाद भी मनुष्य के काम आती है।’

सभी समस्याओं का एकमात्र हल विकास
प्रधानमंत्री ने कहा कि सभी राज्य एक दूसरे से विकास को लेकर प्रतिस्पर्धा कर रहे हैं। राज्य और केंद्र के बीच विकास की स्पर्धा हो। गांव, गली, मोहल्ले में विकास की स्पर्धा हो। विकास का वातावरण बनाने की जरूरत है। उन्होंने कहा कि केंद्र और तेलंगाना सरकार भी साथ मिलकर विकास पर काम कर रहे हैं।

बिजली की नई तकनीकों पर दे रहे हैं बल
मेडक में 1200 मेगावाट के थर्मल पावर प्लांट की आधारशिला रखने गए पीएम मोदी ने कहा, ‘बिजली की प्रति यूनिट जो पहले ग्यारह रुपये में मिला करती थी वो अब डेढ़ रुपये प्रति यूनिट मिल रही है। बिजली में हम न्यूक्लियर, हाइड्रो, सोलर पावर पर बल दे रहे हैं। पानी और प्रकाश दोनों परमात्मा की कृपा से आता है।’

बूंद-बूंद बचाना है पानी
पीएम ने पानी को बचाने पर बल देते हुए कहा कि महात्मा गांधी की जन्मस्थली पोरबंदर में 200 साल पहले ही पानी बचाने की जरूरत पर काम शुरू हो गया था। उन्होंने कहा, ‘पानी का महत्व तब मालूम पड़ता है जब पानी नहीं होता है। तब इंसान का क्या हाल होता है? पानी बचाना है। वर्षा की एक-एक बूंद बचाने की कोशिश करनी होगी।’

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