आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस बायोलॉजिकल हथियार बनाने में मदद कर सकता है

एक वायरस को पूरी तरह विकसित करने के लिए जैव विज्ञान की जानकारी जरूरी है, लेकिन एआई इस प्रक्रिया को काफी सरल बना सकता है। एक्सपर्ट्स मानते हैं कि एआई मॉडल अब ऐसे नए टॉक्सिन और रोगजनक डिजाइन बनाने में सहायक हैं, जो पहले संभव नहीं थे।

शोधकर्ता मानते हैं कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस जिस रफ़्तार से विभिन्न क्षेत्रों में तेज़ी से तरक्की कर रहा है, जिसमें बायोलॉजिकल रिसर्च, दवा बनाना और बायोलॉजिकल सिस्टम का डिज़ाइन और एनालिसिस शामिल है, लेकिन इन्हीं काबिलियत का इस्तेमाल गलत कामों के लिए भी किया जा सकता है।

पिछले दिनों जारी टेक अगेंस्ट टेररिज्म की एक स्टडी के हवाले से रिसर्चर्स ने चेतावनी दी है कि आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस आतंकवादियों और कम अनुभवी कट्टरपंथियों के लिए बायोलॉजिकल हथियार बनाने से जुड़ी जानकारी तक पहुंचना आसान बना सकता है।

रिपोर्ट के मुताबिक, मॉडर्न ओपन-सोर्स एआई मॉडल्स को लेकर खास चिंता है, जिन्हें डाउनलोड करके प्राइवेट तौर पर चलाया जा सकता है, जो उन लोगों को खतरनाक मदद दे सकते हैं जिनके पास पहले मुश्किल बायोलॉजिकल हमले करने के लिए ज़रूरी साइंटिफिक एक्सपर्टीज़ नहीं थी।

पिछले दिनों स्टैनफोर्ड यूनिवर्सिटी के माइक्रोबायोलॉजिस्ट और बायोसिक्योरिटी विशेषज्ञ डेविड रेलमैन ने चिंता जताते हुए कहा कि एआई लोगों को यह भी बता सकता है कि डीएनए ऑर्डर को किस तरह बदला जाए ताकि स्क्रीनिंग सिस्टम उसे पहचान न सके।

रिसर्चर्स के मुताबिक, कुछ एआई मॉडल्स को लोकल तौर पर चलाया जा सकता है और उनमें डाली गई जानकारी कंपनी के सर्वर तक नहीं पहुंचती, जिससे अधिकारियों के लिए उनके इस्तेमाल पर नज़र रखना मुश्किल हो सकता है। इस बात का भी खतरा है कि ऐसे मॉडल्स में सिक्योरिटी पाबंदियां कमज़ोर हो जाएंगी या खत्म हो जाएंगी।

विशेषज्ञ इस बात से सहमत हैं कि केवल डीएनए स्क्रीनिंग पर्याप्त नहीं होगी। बीते वर्ष एक अध्ययन में माइक्रोसॉफ्ट शोधकर्ताओं ने पाया था कि कुछ एआई प्रोटीन डिजाइन टूल ऐसे संभावित खतरनाक जीन सीक्वेंस तैयार कर सकते हैं, जो स्क्रीनिंग सिस्टम से बच निकलते हैं। एक्सपर्ट्स का कहना है कि किसी यूजर के लिए आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस से बेहद खतरनाक गतिविधियों में मदद लेना लगभग असंभव बना दिया जाना चाहिए।

इस महीने जारी एक RAND रिपोर्ट में इस समस्या से निपटने के लिए कई लेयर वाला तरीका अपनाने की सलाह दी गई है। रिपोर्ट में सेंसिटिव जानकारी और बायोलॉजिकल मटीरियल तक एक्सेस को कम करने, संदिग्ध एक्टिविटी का पता लगाने में सुधार करने और एआई का गलत इस्तेमाल करने की कोशिश करने वालों को असरदार तरीके से रोकने और सज़ा देने की बात कही गई है।

जानकर यह भी मानते हैं कि एआई और बायोटेक्नोलॉजी की बदौलत भविष्य में चिकित्सा और विज्ञान के लिए क्रांतिकारी साबित हो सकता है लेकिन इसके साथ सुरक्षा उपायों को भी उसी रफ़्तार से मजबूत करना होगा, नहीं तो यह तकनीक मानवता के लिए सुविधा के साथ एक बड़ा खतरा बन सकती है।

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