पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम की एक बड़ी वजह है शराब का सेवन

एक नए अध्ययन के नतीजे बताते हैं कि बियर और स्पिरिट जैसे पेय पदार्थों के सेवन से, अग्नाशय कैंसर का जोखिम बढ़ सकता है।

पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम की एक बड़ी वजह है शराब का सेवन

इस नतीजे तक पहुँचने के लिए विश्व स्वास्थ्य संगठन के कैंसर शोध केन्द्र ने एशिया सहित ऑस्ट्रेलिया, योरोप और उत्तरी अमरीका में लगभग 25 लाख लोगों के आँकड़े जुटाकर उनका अध्ययन किया।

इन आँकड़ों से शराब की खपत और पैंक्रियाटिक कैंसर विकसित होने के जोखिम के बीच एक “मामूली, लेकिन महत्वपूर्ण” सम्बन्ध स्पष्ट होता है। अध्ययन से जुड़ी एक अन्य ख़ास बात यह है कि इसका व्यक्ति की लैंगिक पहचान या धूम्रपान करने या नहीं करने की स्थिति से कोई सम्बन्ध नहीं है।


विश्व स्तर पर पैंक्रियाटिक कैंसर बारहवाँ सबसे आम कैंसर है। लेकिन उच्च मृत्यु दर के कारण यह, कैंसर से होने वाली कुल मौतों में से 5 प्रतिशत के लिए ज़िम्मेदार होता है।


“शराब की खपत, कैंसर का एक जाना-माना कारक है। लेकिन अब तक ख़ासतौर पर पैंक्रियाटिक कैंसर से जोड़ने वाले साक्ष्य स्पष्ट स्थिति प्रस्तुत नहीं करते थे।” यह कहना है डब्ल्यूएचओ में कैंसर शोध पर अन्तरारष्ट्रीय संस्था (IARC) के न्यूट्रिशन एंड मेटाबॉलिज़्म शाखा के प्रमुख और इस अध्ययन के वरिष्ठ लेखक पिएत्रो फेरारी का।

अग्नाशय (pancreas) एक महत्वपूर्ण अंग है जो पाचन के लिए एंज़ाइम और रक्त शर्करा को नियंत्रित करने वाले हार्मोन का उत्पादन करता है। पैंक्रियाटिक कैंसर सबसे घातक कैंसरों में से एक है, जिसकी बड़ी वजह, इसके बारे में देर से पता लगना है।

आईएआरसी के अध्ययन के अनुसार, प्रतिदिन हर अतिरिक्त 10 ग्राम शराब के सेवन से पैंक्रियाटिक कैंसर के जोखिम में 3 प्रतिशत की वृद्धि हुई है।

जो महिलाएँ प्रतिदिन 15 से 30 ग्राम शराब का सेवन करती थीं – यानि लगभग एक से दो पेय – उनके जोखिम में, कम शराब पीने वाले लोगों की तुलना में, 12 प्रतिशत की वृद्धि हुई।

वहीं, जो पुरुष प्रतिदिन 30 से 60 ग्राम शराब पीते थे, उन्हें 15 प्रतिशत अधिक जोखिम था, जबकि 60 ग्राम से अधिक ऐल्कॉहॉल पीने वाले पुरुषों को 36 प्रतिशत अधिक जोखिम था.

पिएत्रो फेरारी ने कहा- “अक्सर शराब के साथ-साथ तम्बाकू का भी सेवन किया जाता है, जिससे सवाल उठता है कि क्या स्थिति ज़्यादा ख़राब दिखने की वजह धूम्रपान है।”

उनके मुताबिक़, विश्लेषण से मालूम हुआ है कि बिना धूम्रपान के शराब का सेवन करने वालों में भी पैंक्रियाटिक कैंसर का जोखिम उतना ही बड़ा है। इससे यह स्पष्ट होता है कि शराब अपने-आप में जोखिम की एक बड़ी वजह है।

उन्होंने कहा कि जीवन भर शराब का सेवन करने से जुड़े प्रभावों को बेहतर ढंग से समझने के लिए अधिक शोध की आवश्यकता है।

2022 में यूरोप, उत्तरी अमरीका, ऑस्ट्रेलिया, न्यूज़ीलैंड और पूर्वी एशिया में कैंसर के मामलों की पहचान और उससे जुड़ी मृत्यु दर, अन्य क्षेत्रों की तुलना में पाँच गुना अधिक थी।

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