अगस्त के महीने में देश के ज़्यादातर हिस्सों में रिकॉर्ड बारिश दर्ज की गई। अब मौसम विभाग ने सितंबर के लिए अनुमान ज़ाहिर किए हैं।सितंबर महीने के लिए आईएमडी ने जो अनुमान जारी किए हैं उसके मुताबिक़, पूरे देश में मासिक औसत वर्षा सामान्य से अधिक 109% से बढ़कर रहने की उम्मीद है। इस माह में देश के अधिकांश हिस्सों में सामान्य या सामान्य से अधिक वर्षा होने की संभावना है।

हालांकि, पूर्वोत्तर और पूर्वी भारत के कुछ भागों, सुदूर दक्षिणी प्रायद्वीपीय भारत के कई क्षेत्रों और सुदूर उत्तरी भारत के कुछ भागों में सामान्य से कम वर्षा होने की बात कही गई है। आईएमडी के मुताबिक, 1971 से 2020 के बीच भारत में सितंबर में बारिश का औसत आंकड़ा 167.9 मिमी रहा है।
बीते महीने यानी अगस्त की बात करें तो पूरा महीना मानसूनी बारिश ने अलग-अलग राज्यों में बाढ़ के हालात पैदा किए। भारी बारिश के चलते कई रिकॉर्ड टूटे हैं। उत्तर में जम्मू-कश्मीर से लेकर पश्चिम में राजस्थान-गुजरात और मध्य-पश्चिम में मुंबई तक में भारी वर्षा से स्थिति बद से बदतर होती गई।
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिम भारत में अगस्त महीने में 2001 के बाद सबसे अधिक बारिश हुई है। इस क्षेत्र में औसत 265 मिलीमीटर बारिश दर्ज की गई है, जो कि 1901 के बाद से 13वां सबसे अधिक बारिश वाला साल रहा है।
अगस्त के महीने में भारत में औसत 268.1 मिमी बारिश हुई, जो कि सामान्य से पांच फीसदी ज्यादा रही। वहीँ पहली जून से 31 अगस्त के बीच देश में कुल 743.1 मिमी बारिश हुई, जो कि सामान्य से छह फीसदी ज्यादा रही।
मौसम विभाग द्वारा प्रेस विज्ञप्ति में बताया है कि उत्तर पश्चिम भारत में अगस्त के महीने में 265 मिमी औसत बारिश दर्ज की गई है। मानसून के इन तीनों महीनों में उत्तर-पश्चिम भारत ने कुल मिलाकर 614.2 मिमी बारिश हुई है जो कि पहली जून से लेकर 31 अगस्त के सामान्य औसत- 484.9 मिमी से 27 फीसदी ज्यादा है।
मौसम विभाग का कहना है कि उत्तर-पश्चिम क्षेत्र में बेतहाशा बारिश की मुख्य वजह भीषण मौसमी घटनाएं रहीं। पंजाब में बारिश से दशकों में सबसे बड़ी बाढ़ आई। यहां नदियों में पानी ज्यादा होने से हजारों हेक्टेयर खेती लायक जमीन डूब गई। लाखों लोगों को अपने घर छोड़कर दूसरी जगहों पर जाना पड़ा है।
हिमालयी राज्यों- उत्तराखंड, हिमाचल प्रदेश में बादल फटने और अचानक बाढ़ आने से भूस्खलन के कारण भारी नुकसान हुआ है। हिमाचल और उत्तराखंड में सड़कें और पुल बह गए, जबकि जम्मू-कश्मीर में बार-बार बादल फटने की वजह से बारिश और भूस्खलन हआ।
दक्षिण प्रायद्वीपीय में भी भारी बारिश ने नए रिकॉर्ड बनाए हैं। यहाँ अगस्त में ही 250.6 मिमी बारिश हुई, जो कि औसत से 31 फीसदी ज्यादा रही। 2001 के बाद से क्षेत्र के लिए यह तीसरा सबसे ज्यादा बारिश वाला अगस्त रहा। वहीं, 1901 के बाद से यह आठवां सबसे भीगा अगस्त था। इस क्षेत्र में पहली जून से 31 अगस्त तक कुल 607.7 मिमी बारिश हुई, जो कि 556.2 मिमी की सामान्य बारिश से 9.3 फीसदी ज्यादा थी।
आईएमडी से जारी खबर में चेतावनी दी गई है कि सितंबर में उत्तराखंड में भारी बारिश से भूस्खलन और फ्लैश फ्लड की घटनाएं हो सकती हैं। इसके अलावा, दक्षिण हरियाणा, दिल्ली और उत्तर राजस्थान में भी सामान्य जीवन प्रभावित हो सकता है।
इस बारिश से उत्तराखंड से निकलने वाली नदियां उफान पर होंगी और इसका असर निचले इलाकों के शहरों और कस्बों पर पड़ेगा। ऐसे में सतर्क रहने की भी बात कही गई है।










