आलिन अब इस दुनिया में नहीं है मगर उसने कई जीवन बचा लिए

दस महीने की आलिन शेरिन अब्राहम का अंतिम संस्कार केरल सरकार पूरे राजकीय सम्मान के साथ करेगी। एक सड़क हादसे में जान गवांने वाली इस बच्ची के अभिभावकों ने इसके अंगों का दान करते हुए प्रेरणा की एक मिसाल कायम कर दी है।

आलिन अब इस दुनिया में नहीं है मगर उसने कई जीवन बचा लिए

रविवार दोपहर 2 बजे जनता इस नन्ही बच्ची को अंतिम विदाई दी जाएगी। उसके बाद दोपहर 3:30 बजे नेडुंगादप्पल्ली के सेंट थॉमस चर्च में पूरे राजकीय सम्मान के साथ उनका अंतिम संस्कार किया जाएगा।

सोशल मीडिया पर मुख्यमंत्री पिनाराई विजयन द्वारा साझा जानकारी में पथानामथिट्टा में हुए एक दुखद सड़क हादसे में मासूम की मौत पर गहरा शोक व्यक्त किया है। मुख्यमंत्री ने आलिन के माता-पिता के फैसले की सराहना की, जिन्होंने अपने गहरे दुख के बीच अपने बच्चे के अंग दान करने का निर्णय लिया।

दस माह की मासूम आलिन शेरिन अब्राहम का एक सड़क हादसे में निधन हो गया था। इस ग़म के पहाड़ के बावजूद माता-पिता उसके अंगदान का फैसला लिया। पथानामथिट्टा की इस नन्ही बच्ची की बदौलत पांच अनजान लोगों को नया जीवन मिल सकेगा। दुनिया को अलविदा आलिन अब किसी की आंखों की रोशनी बनेगी और किसी का जिस्म उसके दिल से धड़कन महसूस करेगा

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक़, इस नन्ही बच्ची के शरीर से लिए गए आंग में लीवर, दो किडनी, हार्ट वाल्व और दो कॉर्निया के दान से आलिन अपने राज्य की सबसे कम उम्र डोनर बन गई है। चिकित्सा अधिकारियों ने इस बात की पुष्टि की है कि इन सर्जरी ने लोगों का जीवन बदलना शुरू कर दिया है। इसके साथ ही आलिन का के अभिभावक भी समाज के लिए एक प्रेरणादायक उदाहरण बन चुके हैं।

रिपोर्ट्स के मुताबिक़, आलिन के दोनों गुर्दे दस साल की बच्ची को सफलतापूर्वक ट्रांसप्लांट की गईं। किडनी का आकार छोटा होने के कारण दोनों ही किडनियां एक ही मरीज को दी गईं, जबकि उसका लीवर एक छह महीने की बच्ची को दिया गया। यह बच्ची भी राज्य में सबसे कम उम्र की लीवर ट्रांसप्लांट प्राप्तकर्ता बन गई है। आलिन की आंखों की कॉर्निया आई बैंक के हवाले की गई है और उसका हार्ट वाल्व तिरुवनंतपुरम के श्री चित्रा संस्थान को डोनेट किया गया है।

बच्ची के अंगों को एक स्थान से दूसरे स्थान तक पहुंचाने के लिए कोच्चि से तिरुवनंतपुरम तक सड़क मार्ग द्वारा ले जाया गया। गौरतलब है कि नागरिक उड्डयन नियमों के कारण रात के समय हेलीकॉप्टर से ट्रांसफर की अनुमति नहीं मिल पाने के कारण यह काम सड़क मार्ग से पूरा किया गया। मेडिकल कॉलेज और किम्स अस्पताल में की गई इस सर्जरी को सफलतापूर्वक संपन्न किया गया है।

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