सौर इकाई वाली सिलाई मशीन ने खोले उम्मीद के नए दरवाज़े

स्वच्छ ऊर्जा, किस तरह सम्मानजनक आजीविका और नए अवसरों का रास्ता खोल सकती है, इसकी मिसाल भारत के दक्षिणी प्रदेश तमिलनाडु में देखने को मिली है। यहाँ के कम आय वाले एक समुदाय में सौर ऊर्जा से चलने वाली सिलाई मशीन महिलाओं के लिए रोज़गार और आत्मनिर्भरता का साधन बन रही है।

सौर इकाई वाली सिलाई मशीन ने खोले उम्मीद के नए दरवाज़े

संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम की इस पहल के तहत तमिलनाडु की नरिकुरावा कॉलोनी में 25 वर्षीय जयलक्ष्मी अपने दो बच्चों की देखभाल के बाद सिलाई मशीन के पास बैठती हैं।

कमउम्र में पढ़ाई छूट जाने के बाद जयलक्ष्मी ने वर्षों तक हाथ से सिलाई करके कुछ आमदनी हासिल की। किसी सप्ताह घर व बच्चों की शिक्षा का ख़र्च निकल आता था, जबकि कई बार परिवार को मुश्किलों का सामना करना पड़ता था। उनके पति को भी नियमित रूप से रोज़गार वाला काम नहीं मिलता था। जयलक्ष्मीको स्थाई काम की तलाश थी मगर उनके सामने अवसर बहुत सीमित थे।

सौर ऊर्जा से चलने वाली सिलाई मशीन तमिलनाडु के कम आय वाले एक समुदाय में महिलाओं को आत्मनिर्भर और सशक्त बना रही हैं। इसकी बदौलत यहाँ की महिलाऐं बच्चों की शिक्षा और घर के खर्चों में सुधार कर पा रही हैं, और खुद को एक छोटे व्यवसायी के रूप में देख रही हैं। इसके लिए संयुक्त राष्ट्र पर्यावरण कार्यक्रम और Selco Foundation जैसी संस्थाओं ने सहयोग किया है।

हालात तब बदले जब संयुक्त राष्ट्र विकास कार्यक्रम की आजीविका और स्वच्छ ऊर्जा पहल उनके समुदाय तक पहुँची। इस पहल के तहत महिलाओं को सिलाई मशीनें, व्यावहारिक प्रशिक्षण और घर से काम शुरू करने के लिए ज़रूरी सहयोग दिया गया।

यह पहल, भारत में विकेन्द्रित नवीकरणीय ऊर्जा को बढ़ावा देने के लिए, यूएनडीपी के व्यापक प्रयासों का हिस्सा है. यूएनडीपी, नवीन और नवीकरणीय ऊर्जा मंत्रालय के साथ मिलकर स्वच्छ ऊर्जा को कृषि, ग्रामीण विकास और जनजातीय क्षेत्रों से जोड़ने पर काम कर रहा है।

जापान के बजट सहयोग से चल रही यह पहल, पाँच प्रान्तों में स्वच्छ ऊर्जा आधारित आजीविकाओं का विस्तार कर रही है। इसके तहत सूक्ष्म उद्यमों के लिए लगभग 500 सौर-आधारित प्रणालियाँ स्थापित की जा रही हैं।

तमिलनाडु में इस कार्यक्रम को भारतीय विकास ट्रस्ट लागू कर रहा है, जो कौशल विकास और स्वच्छ ऊर्जा के माध्यम से ग्रामीण आजीविकाओं को मज़बूत करने पर काम करता है।

नरिकुरावा कॉलोनी जैसे समुदायों में महिलाएँ इन प्रणालियों का उपयोग सिलाई का काम करने, उत्पादकता बढ़ाने और नियमित आय अर्जित करने के लिए कर रही हैं। व्यावहारिक प्रशिक्षण, स्थानीय साझेदारियों और भरोसेमन्द सौर ऊर्जा के ज़रिये, यह कार्यक्रम कम आय वाले परिवारों को स्थिरता और आत्मनिर्भरता की ओर ले जा रहा है।

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