एक नई स्टडी से पता चला है कि पॉपुलर ड्रिंक बोबा टी या बोबा ड्रिंक का ज़्यादा इस्तेमाल करने से किडनी स्टोन, फैटी लिवर, पाचन की समस्या और मेंटल स्ट्रेस जैसी कई हेल्थ प्रॉब्लम हो सकती हैं।

न्यूट्रिशनिस्ट के मुताबिक, यह ड्रिंक सबसे पहले 1980 के दशक में ताइवान में शुरू हुई थी और अब यह दुनिया भर में बहुत पॉपुलर है, खासकर युवाओं में इसका क्रेज़ कहीं ज़्यादा है।
इस ड्रिंक में शामिल टैपिओका पर्ल्स (साबूदाना के दाने) असल में कसावा पौधे के स्टार्च से बने होते हैं, जिनमें न्यूट्रिशन बहुत कम और कैलोरी बहुत ज़्यादा होती है। यूएस डिपार्टमेंट ऑफ़ एग्रीकल्चर के मुताबिक, एक कप सूखे साबूदाना के दानों में लगभग 544 कैलोरी होती हैं।
रिसर्च के मुताबिक, कसावा का पौधा मिट्टी से लेड और कैडमियम जैसे हेवी मेटल्स को सोख सकता है। कुछ रिपोर्ट्स में बबल टी (बोबा टी) के कुछ सैंपल्स में लेड का लेवल ज़्यादा पाया गया है, जो लगातार पीने से सेहत के लिए नुकसानदायक हो सकता है। इसके अलावा, ज़्यादा मात्रा में टैपिओका पर्ल्स (tapioca pearls) खाने से इनडाइजेशन, पेट दर्द, जी मिचलाना और कुछ मामलों में आंतों में रुकावट हो सकती है।
कुछ बोबा टी में मौजूद गाढ़ा करने वाला एजेंट ग्वार गम कब्ज़ को और बढ़ा सकता है। एक्सपर्ट्स ने चेतावनी दी है कि बड़े पर्ल्स छोटे बच्चों के लिए दम घुटने का खतरा भी पैदा कर सकते हैं।
रिसर्च के अनुसार, एक आम कप बोबा टी में 20 से 50 ग्राम शुगर हो सकती है, जो अक्सर कोल्ड ड्रिंक्स से भी ज़्यादा होती है। ज़्यादा शुगर खाने से दांतों की सड़न, मोटापा, टाइप 2 डायबिटीज और फैटी लिवर जैसी समस्याओं का खतरा बढ़ जाता है। किडनी स्टोन और
न्यूट्रिशनिस्ट का कहना है कि बबल टी में मौजूद कुछ चीज़ें, जैसे ऑक्सालेट और फॉस्फेट, किडनी स्टोन की संभावना बढ़ा सकती हैं। चीन में हुई कुछ स्टडीज़ के मुताबिक, जो लोग बहुत ज़्यादा बोबा टी पीते हैं, उनमें डिप्रेशन, एंग्जायटी और थकान की दर भी ज़्यादा होती है।
मेडिकल एक्सपर्ट्स ने सलाह दी है कि बबल टी को पूरी तरह छोड़ने की ज़रूरत नहीं है, लेकिन इसे रोज़ पीने के बजाय कभी-कभी पीना बेहतर है।
कम चीनी के साथ छोटे साइज़ में पीना और ज़्यादा गाढ़ा करने वाली चीज़ों से बचना हेल्थ रिस्क को कम कर सकता है। साथ ही बेहतर होगा कि इसके सेवन को लेकर अपने चिकित्सक या डाइट एक्सपर्ट से सलाह ली जाए।
















